स्वतंत्र ऐ नादान इंसान, तुम मुझे जाने कैसे प्यार करते थे। अपनी इच्छा से जाने क्या क्या खिलाया करते थे । कभी पुचकारते कभी सहलाते रहा करते थे। फिर भी…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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