हमारा जीवन जब हम होते छोटे घरों में लगता था जैसे कैद थे हम, बाहर की दुनिया देखी तो घर तो बिल्कुल मंदिर जैसा। जब हम रहते छोटे गांवो में…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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