हरिगीतिका छंद – रामपाल प्रसादसिंह अनजान सिद्धिदात्री आकीर्ण तेरी सिद्धियों से, जब चराचर था दुखी। शिव ने किया मनुहार तुझसे,[...]
हरिगीतिका छंद – रामपाल प्रसादसिंह अनजान सिद्धिदात्री आकीर्ण तेरी सिद्धियों से, जब चराचर था दुखी। शिव ने किया मनुहार तुझसे,[...]