कलम के सिपाही को शत-शत नमन तस्वीरें नहीं बदलीं ओ संवेदना के शिखर पुरुष ! कलम के सच्चे सिपाही ! ओ कथा सम्राट! तुमने समाज की जिन सड़ी-गली रूढ़ियों से…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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