मैं और मेरे मित्र एक मित्र बोले- “शशिधर” तुम किस चक्की के खाते हो? इस महंगाई के आलम में भी, कद क्यों बढ़ाए जाते हो? मैंने बोला- “क्या रखा है…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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