ऋतुराज के आगमन पर
निकल उठीं हैं दिवा-रश्मियां
नव प्रभात, नव यौवन मन छाया है,
स्वागत के लिए कूक रही है कोकिला
क्रोड से निकल, विहगों ने स्वागत गीत गाया है।
वृक्षों की डालियां झूम कर कह रही हैं-
आओ ऋतुराज आओ।
पुष्प धरा पर बिछ चुके हैं स्वागत में
आओ यहां आसान जमाओ।
अपने कंत के आगमन को बिछाए पलकें
सृष्टि ने, यह कैसा प्रेम-व्यापार किया है!
वसंत दूती के संदेश से पुलकित
इला ने फिर श्रृंगार किया है।
प्रथम मिलन की मीठी उमंग में
मदन की मेदनी पुलक रही है।
अप्रतिम सौंदर्य की आभा में इला
दुल्हन जैसी दमक रही है।
वंदनवारों से सजी ये धरती
मिला जीवन को अब मोल यहां
स्वर्ग आ उतरा है धरा पर
जो कुसुमाकर आए यहां।
इस मीठी उमंग में नाच रहे
कलियों के संग-संग भंवरे
सुप्त इच्छाओं के खुले कपाट
प्रिय सानिध्य में सपने संवरे
कोंपल निकाल उठे तरुओं के
नव प्रभा में; नवजीवन मुस्काया है
स्निग्ध स्पर्श से खिल उठा यौवन
क्लांत हृदय ने नवरत्न पाया है।
रंग-बिरंगी कुसुम कलियों ने
जी-भर उल्लास मनाया है
राधिका के प्रेम में मोहन
कानन में रास रचाया है।
वेदना में जब डूबी सृष्टि
जीवन को तब वेद मिला
छूटा जब सानिध्य श्याम का
प्रेम का सारा भेद खुला।
इसी विरह की वेदना में
सृष्टि ने उर का संधान किया है।
प्रिय ऋतुराज के आगमन पर
कोकिल प्रिया ने यशोगान किया है।
विकास कुमार साव
प्रधान शिक्षक
प्राथमिक विद्यालय चान्दोडीह बेलहर बांका
VIKAS KUMAR SAW

