भारत है वीरों की धरती,
आओं मिलें आजाद से।
अंग्रेज सदा काँपा करते,
जिनके हीं शंखनाद से।
ब्राह्मण कुल का ऐसा बाँका,
डर पाया न परिवाद से।
न्यायाधीश अचंभित-सा था,
निडरता के संवाद से।
भारत है वीरों की धरती,
आओं मिलें आजाद से।
जैसा नाम काम वैसा हीं,
जाना जगत आजाद से।
अमर हो गया लाल देश का,
रहे भारत आबाद से।
कोड़े खाकर भी स्वर गूँजा,
देश के जिन्दाबाद से।
भारत है वीरों की धरती,
आओं मिलें आजाद से।
स्वाभिमान हीं नाम पिता का,
आश्रय जेल आबाद से।
क्रांति ध्वजा लहराया उसने,
याचक नहीं संवाद से।
अचूक निशाना सदा लगाना,
बन गयें थे उस्ताद से।
भारत है वीरों की धरती,
आओं मिलें आजाद से।
छीन ली नींद काकोरी में,
अंग्रेजियत की लाद से।
नाकों दम था किया ब्रिटिश को,
क्रांतिकारी फौलाद से।
था खुद हीं गोली मार लिया,
जीवन जिया आजाद से।
भारत है वीरों की धरती,
आओं मिलें आजाद से।
रामकिशोर पाठक
प्राथमिक विद्यालय भेड़हरिया इंगलिश पालीगंज,पटना