ठंडा का महीना
थर- थर कांँपै सब लोग,
कोना केअ बनाएब खाना
कि खायत बच्चा मोर।
मन नै करैयेअ हम बिछना सेअ निकली
ठंडा पैन सेअ हम बर्तन धोबी,
ठंडा पैन देखी थर थर कांँपै जियरा मोर
कोना केअ बनाएब खाना
कि खायत बच्चा मोर—2।
बच्चा खाएल लय कानै एक तरफ हम बीमार छी
ई सोचै के लेल भनसा घर में हम ठार छी,
बच्चा खाए लेल देखू करै हमरा केना शोर
कोना केअ बनाएब खाना
कि खायत बच्चा मोर।
बिना पैसा के कोना दाएल चौर मंगायब
बनाए सोनाए हम बच्चा केअ खिलायब,
कोना केअ बीतत ठंडा में जीवन मोर
कोना केअ बनाएब खाना
कि खायत बच्चा मोर।
नीतू रानी, विशिष्ट शिक्षिका
स्कूल -म०वि० रहमत नगर
सदर मुख्यालय पूर्णियाँ बिहार
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