यह मेरा वरदान है
कमजोरी नहीं अबला की,
यह ताकत हमारी है।
इसे ही तो पूर्ण है जीवन,
इससे पूर्ण हर नारी है।
क्यों इसके होने से,
मैं अशुद्ध कहलाती हूं।
न रसोई न पूजा घर,
मैं अछूत बन जाती हूं।
जब माहवारी आती है,
दर्द भी विकल बढ़ जाता है।
मेरी इस करुण व्यथा को,
कोई समझ न पाता है।
कोई शर्म की बात नहीं यह,
जो इसको सबसे छुपाना है।
अपने स्वास्थ्य के हित में हमको,
स्वच्छता अपनाना है।
इससे यह संसार रचा है,
यह अभियान हमारा है।
नहीं है यह अभिशाप हमारा,
यह वरदान हमारा है।
बिंदु अग्रवाल शिक्षिका
मध्य विद्यालय गलगलिया
Bindu Agarwal

