अनमोल जिन्दगी-डाॅ अनुपमा श्रीवास्तव

अनमोल जिन्दगी जाए न व्यर्थ जिदंगी यह बड़ा “अनमोल” है, इस धरा पर तेरा नहीं तेरे कर्म का ही “मोल” है । मिल न पाये क्या पता “जीवन” तुझको फिर…

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नर ही नारायण-अर्चना गुप्ता

नर ही नारायण छोड़ पुष्पों की सेज सुहानी जो काँटों का बिस्तर अपनाए कर्मपथ पर सतत चलकर जो सबका पथ प्रदर्शक बन जाए परहित समर्पित वह नर ही जीवन में…

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इंटरनेट का परिचय-अपराजिता कुमारी

इंटरनेट का परिचय इंटरनेट को कहते अंतरजाल यहाँ है सूचनाओं का भंडार एक दूसरे से जुड़कर बना महाजाल दुनिया भर में घुमता रहता Text, Image, Mp3, Video और Information, Data…

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प्रेमचंद-आँचल शरण

प्रेमचंद एकतीस जुलाई अठारह सौ अस्सी को, “माँ” आनंदी के घर जन्में पुत्र महान। पिता अजायब राय का उन्होंने बढ़ाया पूरा मान, और बचपन में उन्होंने रखा उनका नाम धनपत…

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टीचर्स ऑफ बिहार के पद्यपंकज

Vijay Bahdur Singh

टीचर्स ऑफ बिहार के पद्यपंकज, गद्यगुंजन और ब्लॉग टीम लीडर विजय बहादुर सिंह आपका स्वागत करता है। पद्यपंकज, गद्यगुंजन के रचना का सत्यापन श्री विजय बहादुर सिंह जी के द्वारा की जाती है।


धन्यवाद

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