अनमोल जिन्दगी-डाॅ अनुपमा श्रीवास्तव

Dr. Anupama

अनमोल जिन्दगी

जाए न व्यर्थ जिदंगी
यह बड़ा “अनमोल” है,
इस धरा पर तेरा नहीं
तेरे कर्म का ही “मोल” है ।

मिल न पाये क्या पता
“जीवन” तुझको फिर कभी ,
“कीमत” समय की तू समझ
जो करना है कर ले अभी ।

याद रखती दूनियाँ उनको
जिसने खुद को मिटा दिया,
परवाह नहीं की “प्राण” की
जीवन अपना लुटा दिया ।

सोचकर ऐसे जियो तुम
आज ही आखिरी दिन तेरा ,
कुछ करो “रब” के लिए
तुम्हें याद रखेगी “धरा”।

धरती के सब जीव में
“मनु” तू ही तो श्रेष्ठ है,
हर लो सारी दुनियाँ का
जो भी छाया “कष्ट” है।

स्वरचित 
डॉ अनुपमा श्रीवास्तवा
आर. के. एम +2 विद्यालय
जमालाबाद, मुजफ्फरपुर

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

टीचर्स ऑफ बिहार के पद्यपंकज

Vijay Bahdur Singh

टीचर्स ऑफ बिहार के पद्यपंकज, गद्यगुंजन और ब्लॉग टीम लीडर विजय बहादुर सिंह आपका स्वागत करता है। पद्यपंकज, गद्यगुंजन के रचना का सत्यापन श्री विजय बहादुर सिंह जी के द्वारा की जाती है।


धन्यवाद

SHARE WITH US

Recent Post