Day: October 8, 2026

Punam Kumari

मैं एक बिखरी दास्तान हूँ-पुनम कुमारीमैं एक बिखरी दास्तान हूँ-पुनम कुमारी

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  मैं एक बिखरी दास्तान हूँ, कुछ अधूरे ख़्वाबों का नाम हूँ। कभी हँसी में छुपा दर्द हूँ, कभी ख़ामोशी[...]

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Dharmendra Kumar Thakur

मूक वेदना और स्वर्ण मंडी-धर्मेंद्र कुमार ठाकुर मूक वेदना और स्वर्ण मंडी-धर्मेंद्र कुमार ठाकुर 

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मूक वेदना और स्वर्ण मंडी-धर्मेंद्र कुमार ठाकुर  मौन खड़ी प्रकृति रोती है, अंबर से झरते आँसू, पवित्र लगन की वेदी[...]

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Punam Kumari

बच्चों तुम फूल मेरे, बागवान के — पुनम कुमारीबच्चों तुम फूल मेरे, बागवान के — पुनम कुमारी

0 Comments 7:03 pm

बच्चों तुम फूल मेरे, बागवान के — पुनम कुमारी बच्चों, तुम फूल मेरे, विद्यालय बागवा, तुमसे ही महके सदा, मेरा[...]

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