रुप घनाक्षरी छंद में सीमाओं की रक्षा हेतु, कुर्बानी भी देनी होगी, कभी नहीं अधिकार, माँगा जाता हाथ जोड़। बार-बार मरने से- अच्छा होगा खेत आना, डरकर भागता जो, कहलाता…
Author: Anupama Priyadarshini
धरा विचार – मुक्तामणि छंद – राम किशोर पाठक
धरा विचार – मुक्तामणि छंद धरती कहती प्रेम से, सुनें प्यार से बातें। भूल अगर करते नहीं, आज नहीं पछताते।। भीषण गर्मी पड़ रही, काट रहे तरु प्यारे। पीने के…
दोहा – सुधीर कुमार
दोहा कुँवर सिंह मात्रा — २४ यति — १३,११ कुँवर सिंह के त्याग को , कैसे जाएँ भूल । देश भक्ति की राह में , सदा बिछाए फूल ।। जन्म…
समीक्षा लोग ही करते – एस.के.पूनम
विधाता छंद (1) कलम है पास में मेरे, सदा तैयार लिखने को। पटल पर खास शब्दों को, उकेरा है सिखाने को। निराशा में डगर बदली, पढ़ाया पाठ जीने का। मदय…
विश्व कार्यस्थल सुरक्षा एवं स्वास्थ्य दिवस – राम किशोर पाठक
मनहरण घनाक्षरी कार्यस्थल पर कहीं, दुर्घटना घटे नहीं, स्वास्थ्य सदा रहे सही, ध्यान यह धारिए। सभी जो है कर्मचारी, राष्ट्रहित शुभकारी, देखभाल रहे जारी, स्थल को निहारिए। स्वास्थ्य संरक्षण हित,…
शेष नहीं – शिल्पी
बहरहाल अर्ध हूँ मैं मेरे शून्य का कुछ प्रतिशत मृत्यु के द्वार पर है खड़ा शेष बाट जोह रहा इसके आमंत्रण की मेरे भीतर के पल्लवित ‘स्वंय’ ने आकांक्षा रखी…
मौन नहीं रहना (पहलगाम पर) – राम किशोर पाठक
मौन नहीं रहना– मतगयंद सवैया छंद पार करें दुःख की घड़ियाँ हम, मौन नहीं रहना अब सीखें। छोड़ दिए हम क्यों लड़ना अब, ओज भरें, फिर दुश्मन चीखें।। वार करे…
अफवाहों के दौर में – राम किशोर पाठक
छंद – कुण्डलिया अफवाहों के दौर में, रहिए ज़रा सतर्क। दिल से करके देखिए, मिलता क्या है तर्क।। मिलता क्या है तर्क, कभी पूछो अपनों से। जीवन का उत्सर्ग, रुके…
मानव-जीवन और सत्संग – राम किशोर पाठक
विधा ➖ धत्तानन्द छन्द (११/७/१३) १. जीवन यह अनमोल, भजिए राम, कृपालु है वही सब पर। भाव-भक्ति से बोल, सीता राम, चले आते हैं सुन कर।। २. संत-संग में आज,…
कलमकार का संदेश – राम किशोर पाठक
कलम हमारा आज है, लिखने को तैयार, चिंतन समाज का नहीं, लिखना तब बेकार। शब्दों को बस गूँथते, बनते रचनाकार, कथ्य-शिल्प को छोड़ते, लाते नव आचार। नहीं प्रेम-चिंतन धरे, बिना…