प्रज्ञा की ज्योति जलाए जो, अंधकार को दूर भगाए जो। ज्ञान का दीपक बनकर चमके, हर मन में उम्मीद जगाए जो। चलो प्रज्ञाणिका बन जाएँ, सत्य-पथ पर कदम बढ़ाएँ। अज्ञान…
Author: Anupama Priyadarshini
सुनीता तेरे धैर्य – मनु कुमारी
चहुंओर ओर है छाई खुशियां,नवकलियां मुस्काई है । फ्लोरिडा के तट पर देश की बेटी, आज उतरकर आई है।। साहस शौर्य से भरी वो युवती, धैर्य दृढ़ता का पहन लिबास…
अंक-अंक- राम किशोर पाठक
अंक अंक-अंक जोड़कर वो अंक भर गया, फिर अंक में वो भरने का जिद कर गया, जब अंक के हिसाब में, सिर खपने लगें, फिर अंक से हीं चेहरे का…
नई सुबह – डॉ स्वराक्षी स्वरा
जागो जागो हुई सुबह फिर से आई नई सुबह चिड़ियां गाए फूल खिले है मुस्काई नई सुबह….।। उठकर प्रभु को प्रणाम करो फिर अपने सारे काम करो शांति से बीते…
काश!सबके किस्मत मे होता- अवनीश कुमार
सबके किस्मत मे नही होता दादी की बनाई आचार चट करना और फिर मुस्कुराकर उनके पीछे छिप जाना सबके किस्मत मे नही होता दादू के कंधे पर बैठकर कान्हा बन…
अंगेठी सा तू जल जरा – संजय कुमार गुप्ता
अंगेठी में ना होती लौ ,ना होती कोई लपेटे । पर तमस समेटे रहते हैं ये काले जलते कोयले। यूं ही साए में जीते हैं पर तम- तिमिर-तृष्णा , सब…
इस वर्ष की ईद -संजय कुमार
बड़ा सुहाना है, मौसम इस माह का चेहरे के भाव बताते हैं खुशियों की रंग खेलते हिन्दू बरसाते फूल मुस्लिम अता करते नमाजियों पर, बरसाते गुलाब हिन्दू यही तो रूप…
वो होली का अंदाज़ कहाँ -अवनीश कुमार
अब वो फनकार कहाँ, अब वो रंगों का चटकार कहाँ, अब वो अल्हड़-सी शरारतें कहाँ, अब वो फाल्गुन का अंदाज़ कहाँ? अब वो ढोल-मंजीरा सजी शाम कहाँ, सजी महफ़िल में…
कबीर फिर ना आना इस देश- अवनीश कुमार
रंजिशे बढ़ने लगी है अब इस देश में बात-बात में धार्मिक उन्माद का आतंक दिखने लगा है अब इस देश में हिंदू मुस्लिम लड़ पड़ते हैं अपने हीं देश में…
रंग बदलते चेहरे – अवनीश कुमार
मैं तेरे पास कोई मेरे जैसा शख्स ढूंढता हूं, तेरी अकड़ को ठिकाने लगता देखता हूं। तेरी मूंछों को ताव देने पर भी हौसले के साथ गिरते देखता हूं। तुझे…