| मैं शिक्षक हूँ |

स्व-रचित -कविता मैं शिक्षक हूँ मैं शिक्षक हूँ, हाँ मैं शिक्षक हूँ, राष्ट्र‌ का निर्माता हूँ, ज्ञान का दाता हूँ, हां मैं शिक्षक हूँ। मैं मिट्टी हूँ, पर सोना गढ़‌ता…

जनवरी

जनवरी   जब-जब जनवरी है आती, तब-तब ठंडक है लाती; प्राणी घर में दुबके रहते, ठंडक उनको है ठिठुराती।   बच्चे बूढ़ों पर तो यह, काल जैसी ही मंडराती; युवा…

Primary Teacher

“अभी ना ब्याह रचाओ मां “ अभी ना ब्याह रचाओ मां…. मुझे पढ़ लिख जाने दो अपने पैरों पर खड़ी होकर, मुझे कुछ बन जाने दो। अभी ना ब्याह रचाओ…

क्या बदलाव लायेगा नया साल-विवेक कुमार

बीते को भुलाना, नए को अपनाना, जो खोया उसका रोना, पाए पर इतराना, अच्छाई से दोस्ती, बुराई से घबड़ाना, खट्टी मीठी यादों का बीता सफर सुहाना, यादों के झरोखों से…

रजिस्ट्रेशन के नाम पर सौदा? – ओम प्रकाश

रजिस्ट्रेशन के नाम पर सौदा? सम्मान के बदले भुगतान? पुरष्कार खरीद रहे हैं आप? कहाँ है आपका आत्मसम्मान? काग़ज़ी ट्रॉफियाँ, खरीदे गए मंच, मतलबी तारीफ़ों के साथ गुरु नहीं, ग्राहक…

बचपन

बचपन ना ही किसी की फिक्र है, ना ही किसी का जिक्र हैं, करते हरदम अपने मन की, यही उमर हैं बचपन की। तुरंत रूठना तुरंत मान जाना, लड़ना झगड़ना…