मनहरण घनाक्षरी – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

छंद:- मनहरण घनाक्षरी नदी बीच बिना चीर कभी ना नहाना नीर, सबक सिखाते हमें, सांवला सांवरिया। प्यार को जगाने हेतु राधा को रिझाने हेतु, छिपके कंकड़ मार, फोड़ते गगरिया। सभा…

मतदान – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

हर पाँच सालों पर चुनावी त्यौहार आता, बनाने को सरकार, करें हम मतदान। परिजन मिल कर घर से निकल कर, मतदान केंद्र जाएँ, लेके कोई पहचान। जागरूक मतदाता, देश का…

राम नवमी- दीपा वर्मा

कृष्ण जन्म को कृष्णाष्टमी कहते हैं, राम के जन्म दिन को रामनवमी कहते हैं। दोनों ही भगवान हैं, दोनों ही एक हैं। रामनवमी मना रहे हम सारे सब की जुबां…

कट जाता बंधन- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

जलहरण घनाक्षरी छंद एक साथ चारों भाई पालने में झूल रहे, देख मनोहारी छवि, पाया दुनिया का धन। ऐसे रघुवर पर दिल बलिहारी जाए, राजीव नयन पर, है तन-मन अर्पण।…

किस विधि लूं तेरी थाह प्रिय – मनु रमण चेतना

दिल में है सच्चा प्यार मगर , करते क्यों ना इकरार प्रिय। बस सुनने को व्याकुल है मन, क्यों करते हो इनकार प्रिय। तेरी चाहत और अनंत प्रेम का किस…

सबसे बड़ा धर्म – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

जातियों के नाम पर, इंसानों को बाँटा जाता, अक्सर दो जातियों में, होता तकरार है। कई लोग बैठे हुए हैं दुकान खोलकर, हर जगह धर्म के, कई ठेकेदार हैं। जड़…

शरणागत की रक्षा – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

प्रभाती पुष्प जलहरण घनाक्षरी छंद बक्सर में ऋषियों के यज्ञ को सफल किया, अनुज लखन संग, ताड़का को मार कर। सुग्रीव को प्यार किया, बालि का संघार किया, मारीच-सुबाहु जैसे,…