गीत-नीतू रानी

विषय-गीत दिन-मंगलवार गे बहिना बिना पिया के कोना के खेलब रंग गे, पिया बसै उत्तराखंड गे ना। ककरा से माॅ॑गब रंग अबीर केअ खुआयत पुआ खीर, गे बहिना के लगायत…

शिष्टाचार -जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

मनहरण घनाक्षरी छंद सामाजिक रिवाजों से, कट रहे युवा पीढ़ी, शिष्टाचार – व्यवहार, दिखते न वाणी में। सत्य का महल सदा, टिकता है दुनिया में। कागज की नाव कभी, चलती…

भोले भंडारी- जैनेन्द्र प्रसाद रवि

मनहरण घनाक्षरी छंद गंगाजल जिन्हें भाता, भूत-प्रेत से है नाता, बेलपत्र पर रीझें, भोले जी भंडारी हैं। इन्द्र चढ़ें एरावत, गरूड़ जी हैं विष्णु भक्त, बसहा वरद भाई, शिव की…

प्रेम अनुराग -जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

मनहरण घनाक्षरी छंद बसंत बहार ले के, रंगों का त्योहार आया, जगदंबा माता संग, शिव खेलें फाग है। सिर पर जटा जूट, हाथ लिए कालकूट, बने जब नीलकंठ, गले पड़ा…