बस इतनी सी चाह, हम हो जाते लापरवाह। बस इतनी सी चाह, जब रास्ते चलने लगते हैं तो भटक जाते अपनी राह । बस इतनी सी चाह, जब पानी में…
Author: Anupama Priyadarshini
बेटियाँ -जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
मनहरण घनाक्षरी छंद पढ़ लिख कर बेटी, पैरों पर खड़ी होती, माता-पिता को भी होती, आसानी सगाई में। विचार बदलकर, घर से निकल गई, चूड़ी की जगह ले ली, कलम…
भारत विविधताओं में भी एकता का प्रतीक’-सुरेश कुमार गौरव
भारतीय संस्कृति का सदा बजता रहा है, विश्व में डंका, भारतीय जनमानस में क्या रहनी चाहिए कोई भी शंका? जहां देश से भी ऊपर माना जाता है, एक संविधान, यहां…
मंगलमय दिन आजु हे-नीतू रानी
आप सबों को टीचर्स आॅफ बिहार के चतुर्थ वर्षगाँठ पर हार्दिक शुभकामना एवं बहुत- बहुत बधाई। विषय-वर्षगाँठ शीर्षक-मंगलमय दिन आजु हे। मंगलमय दिन आजु हे चतुर्थ वर्षगाँठ छैन आओल, गाबू…
शांति का विकल्प-जैनेन्द्र प्रसाद रवि
मनहरण घनाक्षरी छंद जब कभी युद्ध होता, शांति को मानव खोता, द्वंद में विनाश छिपा, संतों का है कहना। प्रेम भाईचारा जैसा, लड़ाई विकल्प नहीं, शांति प्रिय लोग चाहें, मिलजुल…
बाल श्रमिक की व्यथा-सुरेश कुमार गौरव
शिक्षा के मंदिर में जाऊं तो जाऊं कैसे! जैसे सब बच्चे हाजरी लगाते हैं जैसे!! है मजबूरियां मेरी और जिम्मेदारियां भी! शिक्षा के रोज गीत गाने का इरादा बदल गया!!…
सर्दी का प्रहर-मनु कुमारी
रे! सर्दी का प्रहर, अब और ना ठहर! क्यों गरीबों के सिर पर तू, ढा रहा है कहर। रे सर्दी का प्रहर।। ठिठुर रहे हैं बच्चे बूढ़े, तन पर झूल…
सुहाना मौसम- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
मनहरण घनाक्षरी छंद सरसों के फूलों पर, तितली है मँडराती, बहारों के आने पर, हँसता चमन है। झूमती खुशी में डाली, खेतों बीच हरियाली, कोयल की तान सुन, खिला तन…
ह्रदय की पुकार- अमरनाथ त्रिवेदी
ह्रदय की पुकार पर , बढ़े चलो -बढ़े चलो । मन कभी विचलित भी हो , तुम भटक गए पथिक भी हो । सुनो हमेशा अपनी पुकार पर , रुको…
डाॅक्टर के पास- नीतू रानी
विषय-जाति गणना जाति गणना कार्य करते हुए लगी ठंड , दाहिने हाथ और पीठ में उठा भयानक दर्द। इसी भयानक दर्द पर करती रही जाति गणना कार्य, जब दर्द मैं…