छुपे हुए व्योम के पीछे , क्या तुम तारे ढूँढ रहे हो ? या उजास के उजले चादर की , तुम सपने बुन रहे हो । क्या अन्तस् का यह…
Author: Anupama Priyadarshini
युवापराक्रम- संजय कुमार
उठो,जागो और आगे बढ़ो विवेकानंद जी का ये नारा, शून्य की सर्वश्रेष्ठ व्याख्या कर बनें विश्व की आँखों का तारा। तर्क अनेकों दिए उन्होंने करता हूँ मैं उनको नमन, जीत…
मनहरण घनाक्षरी- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’
विधा: मनहरण घनाक्षरी राष्ट्र के हैं दिव्य लाल, सौम्य तन उच्च भाल, ज्ञान बुद्धि प्रेम के वे, निर्मल स्वरूप हैं। बाल्य नाम नरेन्द्र है, कर्मयोगी नृपेन्द्र है, देशभक्ति धर्म हेतु,…
मैं सलाम करता हूं- जयकृष्णा पासवान
घर के दहलीज से , बाहर निकल कर । माथे पे जुनून का , पगड़ी पहनकर ।। समाज के ताने और, जमाने की बोली सुनकर। किया परचम लहराया है, इस…
श्रीराम राज्याभिषेक- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
मनहरण घनाक्षरी छंद सफल हों सारे काज, राम होंगे युवराज, राजदरबार संग, हर्षित समाज है। बड़े-बड़े भूप आए, भेंट उपहार लाए, अयोध्या में अब भाई, होगा रामराज है। पुलकित महतारी,…
बाल गीत – नीलिमा कुमारी
खेलोगे कूदोगे होगे खराब। पढ़ोगे लिखोगे होगे नबाब। अब यह बात पुरानी है। लिखनी नयी कहानी है। अब खेलों की बारी है। रूकना मत कोशिश जारी है। खेल खेल में…
हालात से मजबूर- जैनेन्द्र प्रसाद रवि
जीवन के कई रंग, लोग यहां लड़ें जंग, ठंड से ठिठुरे, नहीं चादर है पास में। कोई नहीं देखे अभी, दरवाजे बंद सभी, गली में भिखारी खड़ा- भोजन की आस…
अतुल्य टीका- सुरेश कुमार गौरव
सदियों पूर्व की गई अपने यहां “टीकाओं” की अनूठी शुरुआत एक से बढ़कर एक हुए विद्वजन किए अद्भुत संस्कृति की शुरुआत। अपने देश की कई परंपराएं भी हैं बेहद अर्थपूर्ण…
ठुठरती ठंड- जयकृष्णा पासवान
गगन में कोहरे छाऐ हुए, बादल की छलकती है शमा। जग-सारा विरान हो गए, ठुठरती ठंड की है पनाह ।। कोई चिराग की आशंका नहीं, दिवाकर भी ख़ामोश पड़े। नित-रोज़…
बाल मन- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
बिस्किट मिठाई केक, नौनिहालों को भाते हैं, जहाँ हों खिलौने-टॉफी, आंखें उसी ओर हैं। कोई भी मौसम रहे, खुशियों की बाँह गहें, गली से चौबारे गूंजे, बच्चों की ही शोर…