मैं नारी हूॅं – स्नेहलता द्विवेदी ‘आर्या’

मैं नारी हूँ। (सृजन की क्रांति) मैं कल-कल बहती गंगा हूँ। मैं यमुना सहित तिरंगा हूँ, धरती की प्यास बुझाकर मैं। हरियाली अवनि बहुरंगी हूँ, मैं नारी हूँ, मैं नारी…

नर-नारी दोनों का जग में – लावणी छंद गीत- राम किशोर पाठक

नर- नारी दोनों का जग में – लावणी छंद गीत प्रेम भाव जब रहता मन में, भरकर लगता गागर है। नर- नारी दोनों का जग में, होता मान बराबर है।।…

खाद्य सुरक्षा पर रखना ध्यान – मृत्युंजय कुमार

खाद्य सुरक्षा पर रखना ध्यान सुरक्षित और स्वस्थ भोजन हो अपना। तभी स्वास्थ्य बेहतर रहेगा अपना।। मिलावटी खाद्य सामग्री पहचानें। संतुलित आहार को अपनाना जानें।। पोषक तत्व वाला भोजन करना।…

छुट्टियों का आनंद – मृत्युंजय कुमार

छुट्टियों का आनंद बड़ी मुद्दत से आई छुट्टियाँ। सबों के चेहरे पर लाई खुशियाँ।। परिवार के साथ-साथ दोस्तों संग छुट्टियों का आनंद उठायेंगे। पर्यटन स्थल के साथ-साथ धार्मिक स्थल घूमने…

गंगा दशहरा – द्विगुणित सुंदरी छंद गीत – राम किशोर पाठक

गंगा दशहरा – द्विगुणित सुंदरी छंद गीत मास ज्येष्ठ दशमी को, गंगा भू पर आना। आज दशहरा गंगा, जन-जन में कहलाना।। वंश इक्ष्वाकु जाने, राजा सगर बखाने। अश्वमेध का घोड़ा,…

धरती की पुकार – कुमकुम कुमारी ‘काव्याकृति’

धरती की पुकार धरती कहे पुकार के, अब सुन लो मेरे लाल। हर सुख-सुविधा तुम यहाँ से पाते, फिर,क्यों नहीं करते मेरा श्रृंगार। धरती कहे……………… नदियाँ-झड़ने सब सूख रहे हैं,…

निहारे जा रहा हूॅं मैं- रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’

निहारे जा रहा हूॅं मैं। फिर से चित्र बनाने को, फिर से इत्र सुॅंघाने को, लेकर खुशी के ढोल-,नगारे जा रहा हूॅं मैं। निहारे जा रहा हूॅं मैं। पुन: आदि…