गुरु पग गहकर

गुरु पग गहकर- सुपवित्रा छंद वार्णिक हम-सब हरपल, सफल यहाँ हैं। सबल प्रबल बन, मगन जहाँ हैं।। सरस सहज सब, गजब कहाँ है। हितकर गुरु जब, सजग वहाँ है।। पथ…

हम शिक्षक राष्ट्र प्रणेता हैं – राम किशोर पाठक

हम शिक्षक राष्ट्र प्रणेता हैं हम शिक्षक राष्ट्र प्रणेता हैं। हम पल-पल के अध्येता हैं।। हम ही समाज के नेता हैं। दुख दर्द सभी के क्रेता हैं।। हम नवल राह…

राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस- राम किशोर पाठक

राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस अंतरिक्ष की बात अलग है, इसकी सीमा ज्ञात नहीं। धरती अम्बर संग मिलें तो, बदले कुछ हालात कहीं।। अगणित तारें ग्रह नक्षत्र, नभ में दिखते रहते हैं।…

रोग का निदान- रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’

रोग का निदान! आइए हवा भरे। संग-संग में चरे।। भागते विहान में। शांत आसमान में।। ∆ स्वेद पूर्ण देह से। मित्र के सु-नेह से।। रोम प्राणवान है। रोग का निदान…

भारत के अग्निवीर – गीत – राम किशोर पाठक

भारत के अग्निवीर – गीत शूर वीर हैं धरती के हम, लिखते हौसलों से तकदीर। हम पीछे हटना क्या जानें, हम हैं भारत के अग्निवीर।। गद्दारों पर मेरी रहती, पैनी…

भ्रष्टाचार – तमाल छंद गीत – राम किशोर पाठक

भ्रष्टाचार – तमाल छंद गीत किया सभी ने सद्कर्मों से, बैर। भ्रष्टाचार जहाँ फैलाया, पैर।। मुश्किल करना होता अब तो, काम। जीवन का अब अंग बना है, दाम।। चाहत सबकी…