मातृ दिवस – गिरीन्द्र मोहन झा

मातृ दिवस   पिता देखता है स्वप्न, मेरा बेटा नाम करे, शुभ-श्रेष्ठ काम करे, प्राध्यापक, जिलाधिकारी बने, हृदय में होता प्यार, मुख पर अमृतवचन, ये वचन देते पग-पग पर, शिक्षा…

बुद्धं शरणं गच्छाम: – राम किशोर पाठक:

बुद्धं शरणं गच्छाम:। संघं शरणं गच्छाम:।। चत्वारि आर्यसत्यानि, जीव जीवने संगानि, दु:खं, दु:खस्य कारणं वा, निरोधं, निरोधगामिनीं प्रतिपदा। बुद्धं शरणं गच्छाम:। संघं शरणं गच्छाम:।। अहिंसा, अस्तेय, कामेच्छा वर्जनम्, अनृतं च…

बुद्धत्व की प्राप्ति – अमरनाथ त्रिवेदी

  बड़ा   लक्ष्य   जिन्हें     पाना   हो , छोटी-छोटी बातों पर भी  ध्यान  दिया करते ।   जिन्हें  अपने  पर  विजय  पाना   हो , वे कभी  विलासी बातों में …

कर्म – नूतन कुमारी

कर्म   धर्म का राह कभी सरल नहीं होता, अधर्म से बड़ा कोई हलाहल नहीं होता युगों – युगों तक स्मरण करें हर कोई, यह मार्ग इतना अविरल नहीं होता।…