माँ माँ! सुंदर ! बहुत सुंदर, शब्द ब्रम्ह समाया, अंतस्थ अन्तर्मन रोम-रोम, स्पंदन, समर्पण, सुंदर, सुरभित चितवन! माँ! मेरी संगिनी, प्रेम की रागिनी, दुलार की अद्भुत सरिता, प्रेमाश्रु…
Author: Ram Kishor Pathak
महाराणा प्रताप – राम किशोर पाठक
महाराणा प्रताप राजस्थान के मेवाड़ में, सिसोदिया राजवंश था। वीर उदय सिंह द्वितीय का, जन्म लिया एक अंश था।। जयवंता बाई सोनगरा, क्षत्रिय नाम सुमार था। जिनके पावन गर्भ…
माता का सम्मान हमेशा- अमरनाथ त्रिवेदी
माता का सम्मान हमेशा कन्याओं को जब रहने दोगे , तभी तो माँ बन पाएगी । उदर में ही खत्म करने पर तुले अगर हो तो फिर कैसे माता का…
मेरी मुन्नी- बाल कविता- राम किशोर पाठक
मेरी मुन्नी सुबह खिड़की जब खोली माई, सूरज की किरणें थी आई। मुन्नी आँखें खोल न पाई, मईया ने आवाज लगाई।। आँखें मींचकर मुन्नी उठी, मईया से जैसे हो रुठी।…
मनहरण घनाक्षरी विधान – राम किशोर पाठक
मनहरण घनाक्षरी विधान घोटक की चले टाप, आठ-आठ पग नाप, पद को बनाए आप, तुकांत बखानिए। आठ पग चले तीन, चौथी चलें सात गिन, चार पद रचें लीन, चरण…
माँ-जीवन की ममता मूरत -सुरेश कुमार गौरव
माँ-जीवन की ममता मूरत तेरी दुआओं की छाया में पलते, जीवन के काँटे भी फूलों सा छलते। तेरी ही ममता है साँसों में बहती, हर दर्द में भी…
दुश्मन के नापाक इरादे- मनु कुमारी
दुश्मन के नापाक इरादे – ताटंक छंद दुश्मन के नापाक इरादे, सफल नहीं हो पायेंगे। बुरी नजर से देखेगा गर, दृष्टिहीन कर आयेंगे।। अगर राष्ट्र पर वार…
सिया के राम आए हैं- अमरनाथ त्रिवेदी
Amarnath सिया के राम आए हैं मिलन फुलवारी की देखो, यहाँ सिया के राम छाए हैं। मिथिला की इन गलियों में, पाहुन श्रीराम आए हैं । जगत कल्याण करने …