अस्ताचल सूरज को, हम सब ही प्रणाम करें,उगते सूरज और छठ माता की पूजा, सच्चे मन से करें। संध्या अर्घ्य की रौशनी, जीवन में लाएँ,मन की सारी इच्छा, छठ में…
Author: Swarakshi Swara
चुनावी जुमला..जनेंद्र प्रसाद ‘रवि’
वादे करते हैं सभी, पूरा करते न कभी,जुमला साबित होता, आया हर बार है। धर्म का सहारा ले के,जाति की दुहाई दे के,सामने से हाथ जोड़े, आता उम्मीदवार है। नौकरी …
भाई दूज…नीतू रानी
कार्तिक के महीना भरदूतिया के अछी शोर,जहिना एथिन भैया हम लागब हुनका गोअर। गाए गोबर लाए अंगना निपाएब अरबा चौर पीसी हम ऐरपन बनाएब,ताहि पर देब लाल सिंदूरक ठोपजहिना एथिन…
मन:स्थिति…बैकुंठ बिहारी
मन चंचल है द्रुतगामी है,अकल्पनीय है इसकी स्थिति,कभी व्यथित कभी विचलित,अबूझ है इसकी स्थिति,कभी आत्मकेंद्रित, कभी पराश्रित,अबोधगम्य है इसकी स्थिति,कभी किंकर्तव्यविमूढ, कभी स्वावलंबी,दुर्बोध है इसकी स्थिति,कभी हर्षित,कभी शोकग्रस्त,गूढ है इसकी…
मन अगर वैधव्यमय हो.. डॉ स्वराक्षी स्वरा
मन अगर वैधव्यमय होतन सजाकर क्या करूंगी? चाह कब मैंने किया थास्वर्ण से यह तन सजानाऔर तो इच्छा नहीं थीआसमां तक उड़के जानाकामना इतनी सी मेरीसाथ मिलकर पग बढ़ाना पांव…
भावुक हूं मैं.. डॉ स्वराक्षी स्वरा
हां,मैं भावुक ही तो हूंतभी तो सह नहीं पातीहल्की सी भी चोट,फिर चाहे वो शरीर पर हो या कि लगे हों दिल पर।। हां,मैं भावुक ही तो हूंतभी तो देख…
हिंदी (ग़ज़ल) स्वराक्षी स्वरा
निज भाषा का मान है हिंदीहम सबका सम्मान है हिंदी ।। साहि त्यिक समृद्धि काद्योतक है,अवमान है हिंदी ।। सब भाषा से घुल जाती हैसच में बड़ी महान है हिंदी…
कौन? रत्ना प्रिया
नित्य कर्म करती है प्रकृति पर,रहती है शाश्वत मौन,कई प्रश्न उठते हैं मन में,इसका उत्तर देगा कौन ? नित्य समय पर दिनकर आता,प्रकाश का अक्षय भंडार,इस जगती के हर प्राणी…
अंतरिक्ष की सैर… रणजीत कुमार
Antriksh ki sair आज यह बात जान लो मुनिया। अंतरिक्ष की है अपनी दुनिया।। ऊपर देखो नीला गगन। चमक रहे सूरज दन -दन।। यह देता दिन में…
चलो नेह का दीप जलाएँ- किशोर छंद – राम किशोर पाठक
चलो नेह का दीप जलाएँ- किशोर छंद चलो नेह का दीप जलाएँ, कैसे भी। सबसे मिलकर स्नेह बढ़ाएँ, कैसे भी। क्षमा भाव को मन में लाएँ, कैसे भी। सबको अपना…