Author: Swarakshi Swara

गर्व से हिंदू कहे तो..रामपाल प्रसाद सिंहगर्व से हिंदू कहे तो..रामपाल प्रसाद सिंह

0 Comments 2:59 pm

सुमेरु छंद (10,9)1222 12, 22 122 गर्व से हिंदू कहे तो। घटा घनघोर नभ,छाई कहाॅं से।गई थी लौट कर,आई कहाॅं[...]

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किसानों की बेचैनी..जनेंद्र प्रसाद रविकिसानों की बेचैनी..जनेंद्र प्रसाद रवि

0 Comments 2:54 pm

कार्तिक है बीत रही,रबी अभी लगी नहीं,आसमां में काले घन, दिखा रहे नैन हैं। खेतों में   तैयार  धान, आती नहीं[...]

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बाल कविता आओ मिलकर छठ करें..अवधेश कुमारबाल कविता आओ मिलकर छठ करें..अवधेश कुमार

0 Comments 2:43 pm

अस्ताचल सूरज को, हम सब ही प्रणाम करें,उगते सूरज और छठ माता की पूजा, सच्चे मन से करें। संध्या अर्घ्य[...]

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चुनावी जुमला..जनेंद्र प्रसाद ‘रवि’चुनावी जुमला..जनेंद्र प्रसाद ‘रवि’

0 Comments 2:27 pm

वादे करते हैं सभी, पूरा करते न कभी,जुमला साबित होता, आया हर बार है। धर्म का सहारा ले के,जाति की[...]

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भाई दूज…नीतू रानीभाई दूज…नीतू रानी

0 Comments 6:28 pm

कार्तिक के महीना भरदूतिया के अछी शोर,जहिना एथिन भैया हम लागब हुनका गोअर। गाए गोबर लाए अंगना निपाएब अरबा चौर[...]

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मन:स्थिति…बैकुंठ बिहारीमन:स्थिति…बैकुंठ बिहारी

0 Comments 6:19 pm

मन चंचल है द्रुतगामी है,अकल्पनीय है इसकी स्थिति,कभी व्यथित कभी विचलित,अबूझ है इसकी स्थिति,कभी आत्मकेंद्रित, कभी पराश्रित,अबोधगम्य है इसकी स्थिति,कभी[...]

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मन अगर वैधव्यमय हो.. डॉ स्वराक्षी स्वरामन अगर वैधव्यमय हो.. डॉ स्वराक्षी स्वरा

0 Comments 7:41 pm

मन अगर वैधव्यमय होतन सजाकर क्या करूंगी? चाह कब मैंने किया थास्वर्ण से यह तन सजानाऔर तो इच्छा नहीं थीआसमां[...]

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भावुक हूं मैं.. डॉ स्वराक्षी स्वराभावुक हूं मैं.. डॉ स्वराक्षी स्वरा

0 Comments 10:42 am

हां,मैं भावुक ही तो हूंतभी तो सह नहीं पातीहल्की सी भी चोट,फिर चाहे वो शरीर पर हो    या कि लगे[...]

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हिंदी (ग़ज़ल) स्वराक्षी स्वराहिंदी (ग़ज़ल) स्वराक्षी स्वरा

0 Comments 4:52 pm

निज भाषा का मान है हिंदीहम सबका सम्मान है हिंदी ।। साहि त्यिक  समृद्धि  काद्योतक है,अवमान है हिंदी ।। सब[...]

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कौन? रत्ना प्रियाकौन? रत्ना प्रिया

0 Comments 8:52 am

नित्य कर्म करती है प्रकृति पर,रहती है शाश्वत मौन,कई प्रश्न उठते हैं मन में,इसका उत्तर देगा कौन ? नित्य समय[...]

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