गर्व से हिंदू कहे तो..रामपाल प्रसाद सिंह

सुमेरु छंद (10,9)1222 12, 22 122 गर्व से हिंदू कहे तो। घटा घनघोर नभ,छाई कहाॅं से।गई थी लौट कर,आई कहाॅं से।।हजारों रश्मियाॅं, लाचार अब हैं।लगा सूरज जरा,बीमार अब हैं।। मगर…

किसानों की बेचैनी..जनेंद्र प्रसाद रवि

कार्तिक है बीत रही,रबी अभी लगी नहीं,आसमां में काले घन, दिखा रहे नैन हैं। खेतों में   तैयार  धान, आती नहीं खलिहान,तब तक हलधर, रहते बेचैन हैं। डर है बादल  कहीं-…

बाल कविता आओ मिलकर छठ करें..अवधेश कुमार

अस्ताचल सूरज को, हम सब ही प्रणाम करें,उगते सूरज और छठ माता की पूजा, सच्चे मन से करें। संध्या अर्घ्य की रौशनी, जीवन में लाएँ,मन की सारी इच्छा, छठ में…

चुनावी जुमला..जनेंद्र प्रसाद ‘रवि’

वादे करते हैं सभी, पूरा करते न कभी,जुमला साबित होता, आया हर बार है। धर्म का सहारा ले के,जाति की दुहाई दे के,सामने से हाथ जोड़े, आता उम्मीदवार है। नौकरी …

भाई दूज…नीतू रानी

कार्तिक के महीना भरदूतिया के अछी शोर,जहिना एथिन भैया हम लागब हुनका गोअर। गाए गोबर लाए अंगना निपाएब अरबा चौर पीसी हम ऐरपन बनाएब,ताहि पर देब लाल सिंदूरक ठोपजहिना एथिन…

मन:स्थिति…बैकुंठ बिहारी

मन चंचल है द्रुतगामी है,अकल्पनीय है इसकी स्थिति,कभी व्यथित कभी विचलित,अबूझ है इसकी स्थिति,कभी आत्मकेंद्रित, कभी पराश्रित,अबोधगम्य है इसकी स्थिति,कभी किंकर्तव्यविमूढ, कभी स्वावलंबी,दुर्बोध है इसकी स्थिति,कभी हर्षित,कभी शोकग्रस्त,गूढ है इसकी…

मन अगर वैधव्यमय हो.. डॉ स्वराक्षी स्वरा

मन अगर वैधव्यमय होतन सजाकर क्या करूंगी? चाह कब मैंने किया थास्वर्ण से यह तन सजानाऔर तो इच्छा नहीं थीआसमां तक उड़के जानाकामना इतनी सी मेरीसाथ मिलकर पग बढ़ाना पांव…

भावुक हूं मैं.. डॉ स्वराक्षी स्वरा

हां,मैं भावुक ही तो हूंतभी तो सह नहीं पातीहल्की सी भी चोट,फिर चाहे वो शरीर पर हो    या कि लगे हों       दिल पर।। हां,मैं भावुक ही तो हूंतभी तो देख…

हिंदी (ग़ज़ल) स्वराक्षी स्वरा

निज भाषा का मान है हिंदीहम सबका सम्मान है हिंदी ।। साहि त्यिक  समृद्धि  काद्योतक है,अवमान है हिंदी ।। सब भाषा से घुल जाती हैसच में बड़ी महान है हिंदी…

कौन? रत्ना प्रिया

नित्य कर्म करती है प्रकृति पर,रहती है शाश्वत मौन,कई प्रश्न उठते हैं मन में,इसका उत्तर देगा कौन ? नित्य समय पर दिनकर आता,प्रकाश का अक्षय भंडार,इस जगती के हर प्राणी…