ठंडी हवा लिए आई
मेरी बसंती शाम,
इससे प्रभावित हो रहा
देश, विदेश और गाम।
बसंत पंचमी पर्व पर
आई बसंती शाम,
थोड़ी ठंडी बढ़ गई
लोगों को हुआ जुकाम।
लोगों को हुआ जुकाम
चिकित्सक के पास गये दौड़े,
ख़र्च हो गये रुपए
जेब में बच गए थोड़े।
जब से आई बसंती शाम
लोग हो रहे बड़े परेशान,
लेकिन यहाँ बसंत पंचमी पर
लोग गा रहे सरस्वती गान।
आ गई बसंती शाम लेकर बसंत ऋतु
मैं लिखी हूँ ये रचना मेरा नाम है नीतू,
जिस दिन से बसंती शाम आई है
चारों तरफ खुशियांँ हीं खुशियांँ छाई है।
नीतू रानी, विशिष्ट शिक्षिका,
स्वरचित कविता बसंती शाम।
स्कूल -म०वि० रहमत नगर सदर मुख्यालय पूर्णियाँ बिहार।
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