पद्यपंकज Hall of Fame,Hall of Fame February 2026,Khushi,sandeshparak,Shakshanik,प्रकृति बसंत की बहार- मुन्नी कुमारी

बसंत की बहार- मुन्नी कुमारी



बसंत की बहार है,
वर्षा की फुहार है।
रंगों का त्योहार है,
आया खुशियों का बौछार है।

सूरज की किरणे सारी,
कोयल की कूक प्यारी।
भँवरे की राग न्यारी,
गीतो की सूर प्यारी।

रंग-बिरंगे फूलो ने ली अंगड़ाई,
पीली- पीली सरसों छाई।
आम की मंजरी निकलकर आई,
ऋतु बंसत की मान बढ़ाई।

सूनी डाली पर आई हरियाली,
चिड़ि‌या चहके डाली- डाली।
प्रसन्नता की शोभा निराली,
ये मौसम कैसी मस्ती वाली।

खेतो में हरे-भरे फसले लहराएँ।
फूलों पर भौंरे मंडराएँ,
चलो हम सब मिलकर बसंत मनाएँ,
नाचे गाएँ खुशी मनाएँ।

रचियता- मुन्नी कुमारी
प्रधान शिक्षिका
प्राथमिक विद्यालय मोहनपुर मुशहरी
प्रखण्ड- झंझारपुर, मधुबनी

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