“छठ पूजा का ठेकुआ हूं, स्वाद से भरपूर
लिट्टी चोखा आचार हूं मैं
शिक्षक नवाचार हूं मैं
अजी हां बिहार हूं मैं !!
“चाणक्य की नीति हूं , आर्यभट्ट का आविष्कार हूं मैं।
महावीर की तपस्या हूं , बुद्ध का अवतार हूं मैं। अजी हां ! बिहार हूं मैं।
सीता की भूमि हू, विद्यापति का संसार हूं मैं।
जनक की नगरी हूं, मां गंगा का श्रंगार हूं मैं।। अजी हां ! बिहार हूं मैं।
चंद्रगुप्त का साहस हूं, अशोक की तलवार हूं मैं।
बिंदुसार का शासन हूं , मगध का आकार हूं मैं। अजी हां ! बिहार हूं मैं।
दिनकर की कविता हूं, रेणु का सार हूं मैं।
नालंदा का ज्ञान हूं, पर्वत मन्दार हूं मैं।
अजी हां ! बिहार हूं मैं।
वाल्मिकी की रामायण हूं, मिथिला का संस्कार हूं मैं।
पाणिनी का व्याकरण हूं, ज्ञान का भण्डार हूं मैं।। अजी हां ! बिहार हूं मैं।
राजेन्द्र का सपना हूं, गांधी की हुंकार हूं मैं।
गोविंद सिंह का तेज हूं, कुंवर सिंह की ललकार हूं मैं।। अजी हां ! बिहार हूं मैं।
अर्जुन केशरी
प्रधान शिक्षक
प्राथमिक विद्यालय मिर्धाचक आदिवासी टोला
कहलगांव, भागलपुर

