मातृ दिवस पिता देखता है स्वप्न, मेरा बेटा नाम करे, शुभ-श्रेष्ठ काम करे, प्राध्यापक, जिलाधिकारी बने, हृदय में होता प्यार, मुख पर अमृतवचन, ये वचन देते पग-पग पर, शिक्षा…
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बुद्धं शरणं गच्छाम: – राम किशोर पाठक:
बुद्धं शरणं गच्छाम:। संघं शरणं गच्छाम:।। चत्वारि आर्यसत्यानि, जीव जीवने संगानि, दु:खं, दु:खस्य कारणं वा, निरोधं, निरोधगामिनीं प्रतिपदा। बुद्धं शरणं गच्छाम:। संघं शरणं गच्छाम:।। अहिंसा, अस्तेय, कामेच्छा वर्जनम्, अनृतं च…
धर्मचक्र प्रवर्तन – सुरेश कुमार गौरव
सारनाथ की पुण्य धरा पर, सूर्य उठा फिर ज्ञान गगन पर। पाँच भिक्षु जब पास आए, विनय भाव से शीश झुकाए॥ बुद्ध ने वाणी मधुर सुनाई, करुणा, सत्य,…
बुद्धत्व की प्राप्ति – अमरनाथ त्रिवेदी
बड़ा लक्ष्य जिन्हें पाना हो , छोटी-छोटी बातों पर भी ध्यान दिया करते । जिन्हें अपने पर विजय पाना हो , वे कभी विलासी बातों में …
सत्य अहिंसा का राही- रत्ना प्रिया
सत्य अहिंसा का राही आत्मतत्व की ज्योति पाने, जब कोई अकुलाता है । सत्य अहिंसा का राही तब, गौतम बुद्ध बन जाता है ।। जन्म-जरा और मृत्यु से,…
माँ का प्यार – राम किशोर पाठक
माँ का प्यार – लावणी छंद माँ का प्यार दुलार जगत में, बड़ा अनमोल होता है। माँ के चरणों में पड़ते तो, सुरपुर लगता छोटा है।। जग के पालक…
माँ- डॉ स्नेहलता द्विवेदी आर्या
माँ माँ! सुंदर ! बहुत सुंदर, शब्द ब्रम्ह समाया, अंतस्थ अन्तर्मन रोम-रोम, स्पंदन, समर्पण, सुंदर, सुरभित चितवन! माँ! मेरी संगिनी, प्रेम की रागिनी, दुलार की अद्भुत सरिता, प्रेमाश्रु…
महाराणा प्रताप – राम किशोर पाठक
महाराणा प्रताप राजस्थान के मेवाड़ में, सिसोदिया राजवंश था। वीर उदय सिंह द्वितीय का, जन्म लिया एक अंश था।। जयवंता बाई सोनगरा, क्षत्रिय नाम सुमार था। जिनके पावन गर्भ…
माता का सम्मान हमेशा- अमरनाथ त्रिवेदी
माता का सम्मान हमेशा कन्याओं को जब रहने दोगे , तभी तो माँ बन पाएगी । उदर में ही खत्म करने पर तुले अगर हो तो फिर कैसे माता का…
जानकी नवमी – राम किशोर पाठक
जनक के राज्य में ऐसा भयंकर ग्रीष्म आया था। सरोवर, खेत सूखे थें, नहीं कोई हल चलाया था।। किया था खेत शोधन तो वहाँ पर सीत टकराया। मिला था बंद…