मैं हूॅं माहवारी – मनु कुमारी

मैं हूँ माहवारी! मैं हूँ ईश्वर का वरदान । मैं बढ़ाती हूँ नारी का मान।। संतान सुख का मैं राह बनाती। माँ बनने का सौभाग्य दिलाती।। मैं न हूॅं अभिशाप…

पकड़े उन्हें न बीमारी – लावणी छंद गीत – राम किशोर पाठक

पकड़े उन्हें न बीमारी – लावणी छंद गीत आओं समझे हम नारी को, जिनकी महिमा है भारी। सृजन हमारा जिनसे होता, पकड़े उन्हें न बीमारी।। इनकी जैविक संरचना है, अलग-अलग…

वट-सावित्री – दोहा छंद – राम किशोर पाठक

वट- सावित्री – दोहें खास अमावस ज्येष्ठ को, मिलता ऐसा योग। पति की रक्षा कर सके, नारी निज उद्योग।।०१।। सती शक्ति भूषण सदा, नारी का सम्मान। जिसके आगे हैं झुकें,…

कछुए की चाल- सुरेश कुमार गौरव

कछुए की चाल धीरे-धीरे चलता कछुआ, धैर्य-ध्वनि-सा बलता कछुआ। शांत, सहज, संकल्पी लगता, मौन मगर हर पलता कछुआ।। जल-थल दोनों जीवन उसका, गति में गूढ़ विवेक है जिसका। छोटा तन,…

विश्व कछुआ दिवस – भूषण छंद – राम किशोर पाठक

विश्व कछुआ दिवस – भूषण छंद आज हुआ कछुआ दुर्लभ, रहता है जल के भीतर। कर सकता भी है थल पर, जीवन अपना गुजर-बसर।। लम्बा जीवन जीता यह, इसको ले…

मातृ दिवस – गिरीन्द्र मोहन झा

मातृ दिवस   पिता देखता है स्वप्न, मेरा बेटा नाम करे, शुभ-श्रेष्ठ काम करे, प्राध्यापक, जिलाधिकारी बने, हृदय में होता प्यार, मुख पर अमृतवचन, ये वचन देते पग-पग पर, शिक्षा…