दादा जी की शान निराली दादा जी की बात कहूँ क्या , लगते कितने प्यारे हैं । एक हाथ में छड़ी लिए वे लगते कितने न्यारे हैं । उनका शासन…
Category: बाल कविता
भागो-भागो पानी आया – राम किशोर पाठक
भागो-भागो पानी आया – बाल गीत सबको यह भींगोने आया। भागो-भागो पानी आया ।। देखो बादल गरज रहा है। लगे पटाखा फूट रहा है।। काले, नीले, भूरे बादल। नवल रूप…
लाख दुआएँ देती है – राम किशोर पाठक
लाख दुआएँ देती है भूल अगर हो जाती हमसे, नौ दो ग्यारह भी हो जाते। दौड़ धूप हम इतना करते, अंजर-पंजर ढीले पाते।। चोट हमें लग जाती जब भी, माँ…
हम सुंदर भविष्य बनाएँ- अमरनाथ त्रिवेदी
हम सुंदर भविष्य बनाएँ जहाँ कहीं भी सीख अच्छे मिलते हों , उसे जरूर अपनाएँ । अपने भारत देश को हम , आसमाँ तक पहुंचाएँ । शिक्षित होना बहुत जरूरी…
सहज धरा को स्वर्ग बनाएँ – अंजनेय छंद गीतिका – राम किशोर पाठक
सहज धरा को स्वर्ग बनाएँ – अंजनेय छंद गीतिका आओ मिलकर देश सजाएँ। जन-मानस को पाठ पढाएँ।। सभी भेद का त्याग करें हम। सबको सबसे गले लगाएँ।। होड़ मची बस…
शिक्षा है अधिकार हमारा – गीतिका – राम किशोर पाठक
शिक्षा है अधिकार हमारा – गीतिका शिक्षा है अधिकार हमारा। इससे बनता जीवन प्यारा।। नित्य हमें विद्यालय जाना। गुरुवर देते जहाँ सहारा।। कौशल अपना हमें बढ़ाना। निपुण बनें का लक्ष्य…
बच्चों मन से करो पढ़ाई- देवकांत मिश्र ‘दिव्य’
बच्चों मन से करो पढ़ाई “”””””””””‘””””””””””””””””””””””””””””””””” बच्चों मन से करो पढ़ाई। तुमको दूँगी दूध मलाई।। नहीं किसी से करो लड़ाई।। होगी इससे तभी भलाई।। नित्य सबेरे तुम जग जाओ। आशीष…
फूल बड़े हीं कोमल होते- अमरनाथ त्रिवेदी
फूल बड़े ही कोमल होते फूल खिले हैं बागों में , ये बड़े ही सुंदर लगते ! ये दृश्य मनोहारी होते , ये बहुत ही कोमल कोमल दिखते…
चिकित्सक का कार्य – गीतिका – राम किशोर पाठक
चिकित्सक का कार्य – गीतिका वैद्य, चिकित्सक, हकीम सारे। सबका जीवन सदा सँवारे।। रक्त, लहू, शोणित, लोहित जो। रुधिर, खून की दोष निहारे।। अस्थि, हाड़, हड्डी सब देखें। चर्म, खाल…
समय सुहाने बचपन के – अमरनाथ त्रिवेदी
समय सुहाने बचपन के खेल- खेल में पढ़ते जाएँ। जीवन को अनमोल बनाएँ।। हम नए-नए खेलों को खेलें। नई-नई खुशियाँ भी ले लें ।। हम बच्चे देश के कर्णधार कहलाते।…