मैं पतंग हूँ मुझे उड़ने दो आकाश में-नीतू रानी

मैं पतंग हूँ मुझे उड़ने दो  खुले नीले आकाश में, मेरे पैरों में धागा न बाँधना  नही तो गिर जाउंगा मझधार में। अभी मैं हूँ बहुत हीं छोटा  मैं हूँ…

चित्रा छंद – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ 

शुभ भोर देख कर खग जागे।  डाली तरुवर पर से भागे।। विश्वास ध्यान अब है भू पर। खाद्यान्न प्राण भरते छूकर।। जब भूख विवश करता तन को। करते सहमत अपने…

जुआ-रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ 

छल सुयोधन संग लेकर,चल पड़ा दरबार में। माॅंगना है जो नियोजित,शेष अगली बार में।। पास राजा के पहुॅंचकर,चाल वैसी ही चली। दाव का विश्वास पाकर,ढाल संगत ही ढली।। हर्ष का…

आसरा पास बैठी है – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ 

  खींचती मर्म की रेखा।। जन्म लेते जिसे देखा। आज माॅं खास बैठी है। आसरा पास बैठी है।। दर्द होने नहीं देती। मात रोने नहीं देती।। दौड़ती वो सदा आती।…

काम का महत्व-जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

सीखाते कुरान-गीता, गुरुजन माता-पिता, हमें ये जीवन नहीं, मिला है आराम को। मजदूर किसानों को मिलता विश्राम नहीं, सुबह सबेरे जाग, चल देते काम को। कोई काम छोटा-बड़ा होता है…

तुम मुझको नारी रहने दो… डॉ स्वराक्षी स्वरा

गीततुम मुझको नारी रहने दोअपनी अधिकारी रहने दो ।। सत्ता का लोभ नहीं मुझकोन  दौलत  की  ही चाहत है पैरों   के  बंधन   तोड़  मेरे निर्बन्धता   में    राहत    है चालें तेरी…