नारी- राम किशोर पाठक

नारी का सम्मान, हमें संस्कृति सिखलाती। जीवन की हर राह, हमें नारी ही दिखलाती।। देती जब यह जन्म, दुग्ध से पालन करती। हर-पल भरती नेह, अंक में लालन करती।। ममता…

कलह-मनु कुमारी

प्रेम से बनता स्वर्ग सा घर है,कलह से बिखरता संसार। कलह से अगर बचना है तो, नि:स्वार्थ प्रेम कर रिश्तों से यार।। ईर्ष्या, द्वेष का जब धुंआ उठे, तब दिलों…

बस इतना देना-मधु कुमारी

सृष्टि के निर्माण में  जो साझेदारी कर सकती है  अपना छोड़  जो सबकी हितकारी बन सकती है  जो हंसकर  अपमान भरे विष प्याला भी पी सकती है  हर चुनौती का…

ख्वाब-राहुल कुमार रंजन 

बड़े महंगे ख्वाब नहीं मेरे, मैं जिंदगी में सुकून चाहता हूॅं। चमक – धमक की भीड़ नहीं, बस अपना सा जुनून चाहता हूॅं। ना ऊंचे महलों की आरजू है, न…

तुम हो तो बसंत है-मनु कुमारी

तुम हो तो बसंत है, वरना मौसम रूठ जाते हैं, तुम्हारी हँसी से पतझर भी गीत गुनगुनाते हैं। तुम्हारा साथ मिले तो राहें मुस्कुराती हैं, अधूरी-सी ज़िंदगी भी पूरी हो…

मैं पतंग हूँ मुझे उड़ने दो आकाश में-नीतू रानी

मैं पतंग हूँ मुझे उड़ने दो  खुले नीले आकाश में, मेरे पैरों में धागा न बाँधना  नही तो गिर जाउंगा मझधार में। अभी मैं हूँ बहुत हीं छोटा  मैं हूँ…

चित्रा छंद – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ 

शुभ भोर देख कर खग जागे।  डाली तरुवर पर से भागे।। विश्वास ध्यान अब है भू पर। खाद्यान्न प्राण भरते छूकर।। जब भूख विवश करता तन को। करते सहमत अपने…