नव संवत्सर में शैलजा-राम किशोर पाठक

संवत्सर प्रारंभ नव, प्रथम दिवस है आज। आदि शक्ति शुभ शैलजा, पूजे सकल समाज।। आदि शक्ति के रूप का, दर्श प्रथम कर आज। भक्ति भाव से पूजकर, हर्षित सकल समाज।।…

मातु अम्बे आ रही-राम किशोर पाठक 

मातु अम्बे आ रही। सौम्यता दिखला रही।। भक्त को खुशियाँ मिली। दुष्ट को दहला रही।। रात्रि नौ मधुमास की। दिव्यता बरसा रही।। दिव्य लेकर रूप नौ। शक्ति रूपा भा रही।।…

करो उद्धार प्रभु-कुमकुम कुमारी ‘काव्याकृति’

मुनि से शापित ये सुकोमल सी नारी, हो गई उपेक्षित अहल्या बेचारी।  महा तपस्विनी थी विदुषी जो नारी, क्यों बन गई कड़ी सजा की अधिकारी। देवराज इंद्र की छल की…

हरि वामन बन आए-राम किशोर पाठक

भक्ति पुष्प फुलवारी महके, हरि आते हर्षाए। असुर राज बलि के ही द्वारे, हरि वामन बन आए।। प्रहलाद भक्त पुत्र विरोचन, हरि का ध्यान लगाया। अश्वमेध सौ यज्ञ किया वह,…

वामन अवतार- राम किशोर पाठक

नारायण निज अंश से, ले वामन अवतार। हरने भूतल भार को, प्रकट हुए संसार।। गंगा तट बक्सर शुभद, सिद्धाश्रम स्थान। अदिति गर्भ उत्पन्न हो, लिए नया पहचान।। कश्यप ऋषि के…

अहिल्याबाई होल्कर-राम किशोर पाठक

वीरों की गाथाओं में है, एक पुराना नाम। वीरांगना अहिल्याबाई, को हम करें प्रणाम।। महाराष्ट्र साम्राज्य मराठा, चौंड़ी नामक गाँव। खण्डेराव संगिनी प्यारी, माहेश्वर थी ठाँव।। सीमाओं के बाहर तक…

कृपा करो प्रदान माँ-राम किशोर पाठक

कृपा करो प्रदान माँ। मिले नया विहान माँ।। निदान भूल का करो। विकार शूल को हरो।। विचार शुद्धता भरो। प्रगाढ़ दिव्यता वरो।। गिरा उदार मान माँ। कृपा करो प्रदान माँ।।०१।।…

अंग-अंग प्रेम रंग-राम किशोर पाठक

अंग-अंग प्रेम रंग। साँवरा बना विहंग।। राधिका उदास जान। छेड़ मंद-मंद तान।। सौम्य गीत प्रेम गान। कुंज ढूँढता निदान।। ध्यान में धरे अनंग। अंग-अंग प्रेम रंग।।०१।। श्याम बोलते निहार। राधिका…