आया है गणतंत्र हमारा- सरसी छंद गीत जन-गण-मन हो सुंदर अपना, आओ प्यारे संग।आया है गणतंत्र हमारा, भरने नवल उमंग।। कर्तव्यों को पहले रखकर, फिर पाएँ अधिकार।अपनी इच्छा संग सभी…
Category: Bhakti
For the attainment of God in the world, for the welfare of the person, one has to do spiritual practice for salvation. For this, Bhakti is the best. Therefore, devotion to God and having prayer and meditation is called Bhakti.
कश्यप नंदन देव दिवाकर – राम किशोर पाठक
कश्यप नन्दन देव दिवाकर- सरसी छंद गीत तुमसे ही जग जीवन पाता, करते तुम उपकार।कश्यप नन्दन देव दिवाकर, नमन करो स्वीकार।। तिमिर घनेरा हरने वाले, दिनकर देव महान।क्षमा करें हर…
वसंत- आस्था दीपाली
(हाइकू) १ कोपल मुस्काई- भीनी आम्र-मंजरी में नव-प्राण-स्पंदन। २ पीत-पुष्प खिले- नीरव आँगन के भीतर स्मृति-सरोवर जागा। ३ सरसों हँसी- शीत का अंतिम अश्रु धरा ने पोंछा। ४ मलयानिल बहा-…
मां वागीश्वरी – मनु कुमारी
जयति जय माँ वागेश्वरी, सरस्वती विंध्यवसिनी lसकल जगत की माता तुम हो, हे सकल मंगलकारिनी..जयति माँ वागेश्वरी.. तुम हो पद्मासना माता शांति, सुख, वरदायिनी,जगत का कल्याण कर माँ ,तुम हो…
स्वर की देवी सरस्वती-नीतू रानी
कमल आसन पर बैसल छथि, स्वर की देवी सरस्वती। माँ हँस वाहिनी ज्ञान दायिनी, विद्या दायिनी सरस्वती। कमल आसन पर बैसल छथि, स्वर की देवी सरस्वती। मांँ स्वेत वस्त्र धारिनी…
सरस्वती वंदना – राम किशोर पाठक
सुर ताल पल में सहज साध जाऊँ।मैं जो तुम्हारी चरण धूल पाऊँ।। रचना सभी छंद पल में करूँ मैं।हर छंद में प्रीत का स्वर भरूँ मैं।।कोई सरस गीत पल में…
वर दे वीणावादिनी – बिंदु अग्रवाल
वर दे वीणावादिनी,जय माँ तू हंसवाहिनीहृदय तिमिर को मिटातू ज्योत ज्ञान की जला। अज्ञानता की कालिमा काअब ना अट्टहास हो,दैदिप्यमान हो धराप्रकाश ही प्रकाश हो। धर्म मार्ग पे चलेंअधर्म का…
अरज है शारदा से
अरज है शारदा से हे श्वेतपुंज ! हे शारदा! सुन लो विनय हमारी, हम दीन-हीन है पातकी तू पाप पुंज हारी। अब खोल दो माँ कमल नयन वरदान दे दो…
माँ शारदे-राम किशोर पाठक
भक्त की आशा यही है, भक्त को माँ तार दे। भाव की थाली लिए मैं, द्वार पर माँ शारदे।। पुष्प श्रद्धा भक्ति का मैं, ले शरण में आ गया। कर…
स्वर की देवी सरस्वती-नीतू रानी
कमल आसन पर बैसल छथि, स्वर की देवी सरस्वती। माँ हँस वाहिनी ज्ञान दायिनी, विद्या दायिनी सरस्वती। कमल आसन पर बैसल छथि, स्वर की देवी सरस्वती। मांँ स्वेत वस्त्र धारिनी…