महिमा तोहर अपार – छठ गीत विनती करीं स्वीकार, हे छठी मैया।महिमा तोहर अपार, हे छठी मैया।। कैसे हम परेशान, रहीला हर-पलबनकर सदा नादान, रहीला पल-पलरहे लालसा अपार, हे छठी…
Category: Bhakti
For the attainment of God in the world, for the welfare of the person, one has to do spiritual practice for salvation. For this, Bhakti is the best. Therefore, devotion to God and having prayer and meditation is called Bhakti.
नहाय खाय – राम किशोर पाठक
बाल कविता रोज नहाकर खाती अम्मा।आज अलग इठलाती अम्मा।।अम्मा बोलो कौन खता है?कारण मुझको नहीं पता है। सुर्य देव का व्रत समझायी।आज नहाय-खाय बतलायी।।लकड़ी पर ही जिसे पकायी।दिनकर को थी…
छठ पूजा – नीतू रानी
छठी मैया तोहरो त्योहार। छठ गीत नियम धरम सेएअ हम कईलौं, छठी मैया तोहरो त्योहार। करलौं में छठी के वरतियाकईलौं नहाय-खाय,कदुवा भात। करलौं हम खरना उपास, सहलौं दिन अरबा खेलौं…
छठ-राम किशोर पाठक
छठ-महापर्व- गीत (प्रदीप छंद) झूम रहा है मन मयूर अब, पूरण होगी आस हो।सूर्य देव की करे साधना, मन में रख विश्वास हो।। चार दिनों का है व्रत पावन, मानवता…
भास्कर आराधना -डॉ स्नेहलता द्विवेदी
🙏 भास्कर आराधना -छठ पूजा कार्तिक षष्टी पुण्य प्रभाउ, जानत जन मन लोक सुभाउ। रवि प्रकाश जीवन धर काहु, भास्कर नमन है सहज सुभाउ। तप व्रत भक्ति नही कोई दूजा,…
आस्था न होगा कभी दूजा, ये है हमारा छठ पूजा – रवि कुमार
आस्था न होगा कभी दूजा, ये है हमारा छठ का पूजा।व्रतियों ने खुद को इस तप में भूंजा, इसलिए आज छठ पूजा विश्व में है गुंजा ।। छत्तीस घण्टे का…
अरघ केरऽ बेरिया नु हो- राम किशोर पाठक
अरघ केरऽ बेरिया नु हो – छठ गीत कर जोड़ी करिले विनतिया सुनह सुरुज बतिया नु हो।आदित करूँ नहीं देरिया अरघ केरऽ बेरिया नु हो।। जोड़े-जोड़े फलवा और सुपवा मंँगइले।सूरज…
चित्रगुप्त महाराज -नीतू रानी
विषय -चित्रगुप्त महाराज। शीर्षक -जन्म मरण का लेखा-जोखा सबसे पहले चित्रगुप्त का मतलब- चित्र-का मतलब तस्वीर यानि फोटो गुप्त-गुप्त का मतलब अंदर की बात बाहर प्रकट न हो यानि गुप्त…
बनकर कान्हा गिरधारी-रामकिशोर पाठक
बनकर कान्हा गिरधारी – गीत लीलाधर ने भू पर आकर, लीला की अद्भुत न्यारी। शोक मिटाए ब्रज वनिता की, बनकर कान्हा गिरधारी। पूजन रोका जब सुरपति का, इंद्र कोप थे…
वंदनवार सजे शारदा – रामपाल प्रसाद सिंह
वंदनवार सजे शारदा शोर हुआ अब कानन में। मदिरा सवैया भोर हुई उठ जा प्रिय जीवन, बोल रही कोयल वन में। स्वप्न निरंतर देख रही तुम, शोर हुआ अब कानन…