भूजल का दोहन करें नहीं- लावणी छंद गीत – राम किशोर पाठक

भूजल का दोहन करें नहीं- लावणी छंद गीत भूजल का दोहन करें नहीं, संग्रह बहुत जरूरी है। बसा भूगर्भ में मधुरिम यह, बनी आज मजबूरी है।। मान लिया सच भूमंडल…

मैं नारी हूॅं – स्नेहलता द्विवेदी ‘आर्या’

मैं नारी हूँ। (सृजन की क्रांति) मैं कल-कल बहती गंगा हूँ। मैं यमुना सहित तिरंगा हूँ, धरती की प्यास बुझाकर मैं। हरियाली अवनि बहुरंगी हूँ, मैं नारी हूँ, मैं नारी…

नर-नारी दोनों का जग में – लावणी छंद गीत- राम किशोर पाठक

नर- नारी दोनों का जग में – लावणी छंद गीत प्रेम भाव जब रहता मन में, भरकर लगता गागर है। नर- नारी दोनों का जग में, होता मान बराबर है।।…

छुट्टियों का आनंद – मृत्युंजय कुमार

छुट्टियों का आनंद बड़ी मुद्दत से आई छुट्टियाँ। सबों के चेहरे पर लाई खुशियाँ।। परिवार के साथ-साथ दोस्तों संग छुट्टियों का आनंद उठायेंगे। पर्यटन स्थल के साथ-साथ धार्मिक स्थल घूमने…

भाषा शिक्षण में अंग्रेजी का महत्व – ताटंक छंद गीत – राम किशोर पाठक

भाषा शिक्षण में अंग्रेजी का महत्व- ताटंक छंद गीत भाषा चाहे कोई भी हो, वह संपर्क बनाती है। हृदय भाव का द्वार खोलकर, सबको सहज मिलाती है ।। अंग्रेजी रोमण…

गरल सहज जो पी लेते हैं – स्नेहलता द्विवेदी ‘आर्या’

गरल सहज जो पी लेते हैं मधुर सुधा रस पी लेते हैं, बोलो देखा है कल किसने, प्रतिपल जीवन जी लेते हैं, आओ थोड़ा जी लेते हैं। बैठे गुमसुम गुमसुम…

मेरी लेखनी – भूषण छंद गीत – राम किशोर पाठक

मेरी लेखनी – भूषण छंद आधारित गीत उठा लेखनी लिखते हम, सदा सत्य को करें प्रबल। सभी यहाँ खुश होते कब, लगे कभी मुश्किल सा पल।। झूठ परोसें कहीं अगर,…

पिता – अवनीश कुमार

पिता पिता केवल पिता ही नहीं होते, वे ढहते विश्वास की ढाल होते हैं, टपकती छत का इंतज़ाम होते हैं, हमारे स्वप्निल स्वप्न का लौकिक संसार होते हैं, हमारे निवाले…

लगन सदा मन राम लगाओ- चौपाई – देवकांत मिश्र ‘दिव्य’

लगन सदा मन राम लगाओ विधा: चौपाई “””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””” जब-जब भाव कथा मन आवै। तब- तब प्रेम राम मन भावै।। प्रभुवर के गुण जो मन गाता। सब सुख-शांति सदा वह पाता।।०१…