Category: padyapankaj

Through Padyapankaj, Teachers Of Bihar give you the chance to read and understand the poems and padya of Hindi literature. In addition, you can appreciate different tastes of poetry, including veer, Prem, Raudra, Karuna, etc.

Jainendra

चारो फल पाइए- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’चारो फल पाइए- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 11:43 am

प्रभाती पुष्प 🌹🙏🌹🙏🌹🙏 मनहरण घनाक्षरी छंद भोलेनाथ अंतर्यामी, तीनों लोकों के है स्वामी, लंबोदर माता शिवा-शरण में आइए। भांग-भस्म, कंदमूल,[...]

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S K punam

मनहरण घनाक्षरी- एस.के.पूनममनहरण घनाक्षरी- एस.के.पूनम

0 Comments 7:51 pm

🙏कृष्णाय नमः🙏 विद्या:-मनहरण घनाक्षरी 🌹कविता सुनाइके🌹 काव्य पथ पर चला, शब्द जोड़-जोड़ कर, प्रेम गीता लिख दिया,शब्दों को सजाइके। विचारों[...]

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Manoj

जय होगी- मनोज कुमार दुबेजय होगी- मनोज कुमार दुबे

0 Comments 6:58 pm

आज नही तो कल तुम्हारी ही जय होगी भाग्य नही केवल मेहनत से ही तय होगी अंधकार का नाश प्रकाश[...]

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Jainendra

रूप घनाक्षरी छंद- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’रूप घनाक्षरी छंद- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 9:30 pm

गुरू को समर्पित बागानों में फल-फूल, खेतों बीच कंद-मूल, सुमन को बसंत में, ‘रवि’ महकाता कौन! सूरज कहां से आता[...]

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Jainendra

नारी- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’नारी- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 9:47 pm

समाज की बलि नित्य बनती है औरत, क्या समाप्त हो गई हमें इसकी जरूरत? श्रद्धा से प्रेरणा पा मनु को[...]

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Devkant

पावन होली आई है- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’पावन होली आई है- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 9:46 pm

विधा: गीत(१६-१४) आओ स्नेहिल रंग उड़ाओ, पावन होली आई है। बच्चे बूढ़े नर- नारी पर, कैसी मस्ती छाई है।। सुंदर[...]

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Manoj (Vaishali)

होली तेरे संग चले -मनोज कुमारहोली तेरे संग चले -मनोज कुमार

0 Comments 9:57 pm

होली तेरे संग चले हर एक कली जब बोल उठे, मादक मंजर रस टपके, कोयल कूके तन तरसे, बाग की[...]

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Nidhi

चंचल वन में मनी है होली-निधि चौधरीचंचल वन में मनी है होली-निधि चौधरी

0 Comments 9:55 pm

एक बाल कविता होली आई होली आई, चंचल वन की टोली आई। शेर, जिराफ,लोमड़ी, सियार, सभी को भाया है त्योहार।[...]

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Jainendra

गुरु को नमन-जैनेन्द्र प्रसाद रवि’गुरु को नमन-जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 9:53 pm

पूरब में देख लाली, झूमती है डाली डाली, धरती आबाद होती, सूरज किरण से। बसंत बहार देख, फूलों की कतार[...]

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