पद्यपंकज Bhawna,Prem मां-ब्यूटी कुमारी

मां-ब्यूटी कुमारी


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ममता की निर्मल सरिता,
वसुंधरा सी असह्य पीड़ा,
सह कहलाती जननी ।
स्वयं भूखी परवाह नहीं,
बच्चों के क्षुधा मिटाने को
करती रहती दिन -रात जतन।
कहीं ठोकर खाकर गिरे नहीं,
अंगुली थामें रहती है ।
सूरज के तप्त किरण हो,
या पावस के शीतल बूंद,
आंचल के छांव में छुपा लेती ।
वह अनमोल शब्द है मां,
कभी डांटती फटकारती,
सच्चा मार्ग दिखाती,
प्रथम गुरु कहलाती मां।
नन्हे कदम लड़खड़ाते देख,
दौड़ कर आ जाती मां।
संकट या मुश्किल घड़ी में,
ढाल बन जाती मां।
संतान के आंखों में अश्रु देख,
कोमल नयन से अश्रु बहा लेती।
ममता की निर्मल सरिता,
मां अंबर तू वसुंधरा है।

ब्यूटी कुमारी
प्रधान शिक्षक
दलसिंहसराय,
समस्तीपुर

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