चिड़ियाँ का घर नन्हे-नन्हे “तिनके” लेकर जाती कहां हो बोलो उड़कर, सुबह से शाम तक चुनती हो तुम चिड़िया रानी फुदक-फुदक कर। तेरे तिनके की “गठरी”को जहां कहोगी मैं रख…
Category: Prem
Love has no definition, and it is a feeling that comes within the heart. The meaning of love can be different for different people, different age groups, and different relationships, but the surface is the same for everyone. Love comes from knowledge, and for this, one needs to understand oneself.
माँ तुम हो महान-रीना कुमारी
माँ तुम हो महान गाऊँ मैं माॅं तेरा गुणगान, करुँ मैं सदा तेरा ही बखान, तुम्हीं तो हो मेरा अभिमान, तुम नहीं तो ये जग है सुनसान, माँ! सच में…
बचपन की यादें-प्रीति कुमारी
बचपन की यादें कभी फुरसत के क्षणों में, मन को टटोलने का, अवसर मिलता है तब , याद आती हैं – वो बचपन की बातें, वो चाँदनी रातें, वो गाँव…
हे नारी तू महान है-रोहित कुमार गणेश
हे नारी तू महान है देकर जन्म मुझे, नई दुनिया में लाने वाली पिला कर अपनी शक्ति मुझे शक्ति प्रदान करने वाली धुलाकर प्रत्येक पल मेरे मल मूत्र को, मुझे…
मां की ममता-शिवेंद्र शिवम
मां की ममता बसंत जैसी ऋतु हो तुम। पूर्णिमा की हो चांद।। ममता की आंचल पसारे। करुणा सागर समान।। तेरी ह्रदय से पृथ्वी छोटी। ममता तेरी सबने देखी।। अपने हाथ…
मेरी कविता-गिरिधर कुमार
मेरी कविता मेरी कविता मत हो उदास सोच भी नहीं सकता बिना तुम्हारे कुछ भी… क्या हुआ जो स्याह सी है आबोहवा पसरी हुई हैं खामोशियां किसी कोरोना की कोई…
माँ अनमोल हैै-अनुज वर्मा
माँ अनमोल है माँ तूँ अनमोल है, तेरा न कोई मोल है। मैं तो नादान था, हर गम से अंजान था। नाम मेरा है क्या, ये तूने बताया। माँ तूँ…
नन्हीं कोयल-आँचल शरण
नन्हीं कोयल काली कोयल चहक रही थी, डाल डाल पर फुदक रही थी, कभी शाख पर कभी पात पर, कुहू कुहू तान सुना रही थी। आखेटक की पड़ी टनकार सुनाई,…
वसुंधरा-मधु कुमारी
वसुंधरा माँ वसुंधरा का किया प्रकृति ने अद्भुत श्रृंगार जहां विहग भी करते हैं हरपल सौंदर्य विहार कनक समान धरती चमकती और आसमां भी करते मधुर मलहार…….. बहती नदियां कलकल…
विद्यालयस्य गीतं-अवनीश कुमार
विद्यालयस्य गीतं अस्ति सुंदरं मनभावनम् पवित्र पावनम्। उत्क्रमित मध्य विद्यालय अजगरवा पूर्व प्राँगनम्।। विनयशीलं शिक्षा प्रदाता गुरुजना:। मृदुभाषिणि विद्यादात्री गुरुमातर:।। शीलं अनुशासनं उच्च कोटिकम्। सुंदरं चरित्र विकसितं यस्य प्राँगणम्।। अस्ति…