ये गुलाब समर्पित हैं उन्हें,जिनसे हमने सच्चा प्रेम किया है —निश्छल, अनवरत, बंधनहीन प्रेम। जैसे ही उनकी याद आती है,चेहरे[...]
Category: Prem
Love has no definition, and it is a feeling that comes within the heart. The meaning of love can be different for different people, different age groups, and different relationships, but the surface is the same for everyone. Love comes from knowledge, and for this, one needs to understand oneself.
भावुक हूं मैं.. डॉ स्वराक्षी स्वराभावुक हूं मैं.. डॉ स्वराक्षी स्वरा
हां,मैं भावुक ही तो हूंतभी तो सह नहीं पातीहल्की सी भी चोट,फिर चाहे वो शरीर पर हो या कि लगे[...]
हिंदी – सार छंदहिंदी – सार छंद
हिंदी – सार छंद सागर सी है गहरी भाषा, प्रेम जगाने वाली। इसके अंदर ज्ञान छुपा है, सुंदर सुखद निराली।।[...]
जीवित्पुत्रिका व्रतजीवित्पुत्रिका व्रत
जीवित्पुत्रिका व्रत माता निर्जल व्रत करे, सुखी रहे संतान। महाकाल को पूजती, जो लेते संज्ञान।। एक दिवस उपवास का, कोटि[...]
हिंदी है अस्मिता हमारी -प्रदीप छंद गीत – राम किशोर पाठकहिंदी है अस्मिता हमारी -प्रदीप छंद गीत – राम किशोर पाठक
हिंदी है अस्मिता हमारी -प्रदीप छंद गीत मन के भावों को करती जो, सरल सहज गुणगान है। हिंदी है अस्मिता[...]
हुई उत्पत्ति है हिंदी की – गीत – राम किशोर पाठकहुई उत्पत्ति है हिंदी की – गीत – राम किशोर पाठक
हुई उत्पत्ति है हिंदी की – गीत शौरसेनी अपभ्रंश जिसे, अपनी तनुजा माने। हुई उत्पत्ति है हिंदी की, सुरवाणी से[...]
चलो नेह का दीप जलाएँ- किशोर छंद – राम किशोर पाठकचलो नेह का दीप जलाएँ- किशोर छंद – राम किशोर पाठक
चलो नेह का दीप जलाएँ- किशोर छंद चलो नेह का दीप जलाएँ, कैसे भी। सबसे मिलकर स्नेह बढ़ाएँ, कैसे भी।[...]
दादा-दादी -राहुल कुमार रंजनदादा-दादी -राहुल कुमार रंजन
दादा-दादी हैं सबसे न्यारे,घर-आंगन के चमकते तारे। उनसे मिलता स्नेह अनोखा,हर किस्सा होता है रोचक-रोखा। दादी सुनाए कहानी प्यारी,नींद लगे[...]
पुष्पित हिंदुस्तान है – महाधरणी छंद गीत – राम किशोर पाठकपुष्पित हिंदुस्तान है – महाधरणी छंद गीत – राम किशोर पाठक
पुष्पित हिंदुस्तान है – महाधरणी छंद गीत नमन शहीदों को करें, वीरों का बलिदान है। जिनके पावन त्याग से, पुष्पित[...]
आजादी हमने है पाई – प्रदीप छंद गीत – राम किशोर पाठकआजादी हमने है पाई – प्रदीप छंद गीत – राम किशोर पाठक
आजादी हमने है पाई – प्रदीप छंद गीत भारत की धरती शोणित कर, तन-मन लहूलुहान से। आजादी हमने है पाई,[...]
