Category: sandeshparak

Sandeshparak poems are poems that are used to convey a message with feelings. Through poems, statements related to the country, the world, and society are transmitted to the people. Teachers of Bihar give an important message through the Sandeshparak of Padyapankaj.

एक अनोखी प्रेम कहानी- गीत- राम किशोर पाठकएक अनोखी प्रेम कहानी- गीत- राम किशोर पाठक

0 Comments 7:54 pm

एक अनोखी प्रेम कहानी- गीत युग पुरुष एक ऐसा देखा, देखी जिसमें अलग रवानी। आओ तुमको याद दिलाए, एक अनोखी[...]

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राष्ट्र गान हम गाएँ – मुक्तामणि छंद गीत – राम किशोर पाठकराष्ट्र गान हम गाएँ – मुक्तामणि छंद गीत – राम किशोर पाठक

0 Comments 10:14 pm

राष्ट्र गान हम गाएँ – मुक्तामणि छंद गीत बच्चों में उत्साह को, भरने आगे आएँ। मन हर्षित हो झूम ले,[...]

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पुष्पित हिंदुस्तान है – महाधरणी छंद गीत – राम किशोर पाठकपुष्पित हिंदुस्तान है – महाधरणी छंद गीत – राम किशोर पाठक

0 Comments 7:58 pm

पुष्पित हिंदुस्तान है – महाधरणी छंद गीत नमन शहीदों को करें, वीरों का बलिदान है। जिनके पावन त्याग से, पुष्पित[...]

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यह दिन पाया खास है – प्रदीप छंद गीत – राम किशोर पाठकयह दिन पाया खास है – प्रदीप छंद गीत – राम किशोर पाठक

0 Comments 11:33 pm

यह दिन पाया खास है – प्रदीप छंद गीत देश हमारा आजादी में, चैन हमारे पास है। कुर्बानी को देकर[...]

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आजादी हमने है पाई – प्रदीप छंद गीत – राम किशोर पाठकआजादी हमने है पाई – प्रदीप छंद गीत – राम किशोर पाठक

0 Comments 11:25 pm

आजादी हमने है पाई – प्रदीप छंद गीत भारत की धरती शोणित कर, तन-मन लहूलुहान से। आजादी हमने है पाई,[...]

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आजादी – महाचण्डिका छंद गीत – राम किशोर पाठकआजादी – महाचण्डिका छंद गीत – राम किशोर पाठक

0 Comments 7:02 pm

आजादी – महाचण्डिका छंद गीत इसका अपना अर्थ है, सबको यह समझाइए। आजादी के मूल्य को, जरा समझने आइए।। सहते[...]

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Nitu Rani

यही रात अंतिम, यही रात भारी- नीतू रानीयही रात अंतिम, यही रात भारी- नीतू रानी

0 Comments 6:57 pm

यही रात अंतिम, यही रात भारी विषय -पक्षियों की गोष्ठी। बकरी, मुर्गी,अंडा , मछली और कबूतर ये सभी हैं मीत,[...]

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Jainendra

कीमत चुकानी होगी – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’कीमत चुकानी होगी – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

0 Comments 6:54 pm

कीमत चुकानी होगी मनहरण घनाक्षरी छंद में बिजली के कटने से, बढ़ जाती परेशानी, ए सी में जो रहने की,[...]

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बाल सपने – सार्द्ध मनोरम छंद- राम किशोर पाठकबाल सपने – सार्द्ध मनोरम छंद- राम किशोर पाठक

0 Comments 6:52 pm

बाल सपने – सार्द्ध मनोरम छंद पाँव में पाजेब मनहर बाँध अपने। नाचते हैं श्याम बनकर बाल सपने।। देखकर नंगे[...]

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Girindra Mohan Jha

कर्म – गिरींद्र मोहन झाकर्म – गिरींद्र मोहन झा

0 Comments 6:49 pm

कर्म जो किया जाता है, वही होता है ‘कर्म’, जो करने योग्य हो, वही है कर्त्तव्य-कर्म, कहते हैं, कर्म के[...]

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