सोच रही है लेखनी, कहाँ से प्रारंभ करुँ, फँस गया विचारों में,हो न जाए परिहास। तूलिका भी डर रही, कागज[...]
Category: sandeshparak
Sandeshparak poems are poems that are used to convey a message with feelings. Through poems, statements related to the country, the world, and society are transmitted to the people. Teachers of Bihar give an important message through the Sandeshparak of Padyapankaj.
शिक्षक – कहमुकरी राम किशोर पाठकशिक्षक – कहमुकरी राम किशोर पाठक
शिक्षक – कहमुकरी सबके हित को तत्पर रहता। अपने हक में कभी न कहता।। दोष गिनाते बने समीक्षक। क्या सखि?[...]
बिरसा मुंडा की जयंती-रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’बिरसा मुंडा की जयंती-रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
आजादी आधार, मिली जब से भारत को। दौड़ पड़े सबलोग,विनत हुए सु-स्वागत को।। सुनकर विस्मित मान,रहे हैं खुद को प्राणी।[...]
रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
बोल अरे क ख या ग घ,घोल मिठापन डाल रही है। बैठ गई जब सम्मुख माॅं तब,बालक ज्ञान प्रक्षाल रही[...]
सत्य की ज्योति- कार्तिक कुमारसत्य की ज्योति- कार्तिक कुमार
जब सब ओर अंधियारा छा जाए जब झूठ का शोर बढ़ जाए, जब लोग सत्य को मौन कर दें —[...]
तोटक छंद वर्णिक-रामपाल प्रसाद सिंहअनजानतोटक छंद वर्णिक-रामपाल प्रसाद सिंहअनजान
तोटक छंद वर्णिक(112) 112-112-112-112 दो चरण सम तुकांत दिन में दिखते मन के सपने। हिय में रहने लगते अपने।। रचने[...]
वंदे मातरम् – गीत – राम किशोर पाठकवंदे मातरम् – गीत – राम किशोर पाठक
वंदे मातरम् – गीत भारत वासी दिल के अच्छे, चाहत सदा स्वच्छंद है। वंदे मातरम् गीत सुंदर, गाना सबको पसंद[...]
किसान – राम किशोर पाठककिसान – राम किशोर पाठक
खेतों का है रंग सुनहरा। जैसे सोना रहता बिखरा।। फसल धान की है खेतों में। श्रम का प्रतिफल है रेतों[...]
जाति-वर्ण लोकतंत्र पर भारी – राम किशोर पाठक जाति-वर्ण लोकतंत्र पर भारी – राम किशोर पाठक
है लोकतंत्र की महिमा न्यारी। चलती जिससे संविधान प्यारी।। सबने बदली अब दुनियादारी। लूट रहे धन कहकर सरकारी।। लेकर सारे[...]
मेरी पोषण वाली थाली – अवधेश कुमारमेरी पोषण वाली थाली – अवधेश कुमार
माँ ने सजाये थाली में अनोखे रंग , पोषण थाली अब करेगी कुपोषण से जंग । मोटे अनाज देंगे हमें[...]
