Category: sandeshparak

Sandeshparak poems are poems that are used to convey a message with feelings. Through poems, statements related to the country, the world, and society are transmitted to the people. Teachers of Bihar give an important message through the Sandeshparak of Padyapankaj.

Devkant

उम्मीदों का फूल खिलाने सावन आया- कुण्डलिया – देवकांत मिश्र ‘दिव्य’उम्मीदों का फूल खिलाने सावन आया- कुण्डलिया – देवकांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 10:39 pm

उम्मीदों का फूल खिलाने सावन आया: कुंडलिया “”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””‘”” आया सावन झूमकर, हर्षित हुए किसान। ‌हरी-भरी यह भूमि हो, यही हमारी[...]

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Amarnath Trivedi

मित्रता रूपी कमल हैं खिलते – अमरनाथ त्रिवेदीमित्रता रूपी कमल हैं खिलते – अमरनाथ त्रिवेदी

0 Comments 10:32 pm

मित्रता रूपी कमल हैं खिलते मित्रता  की   भी    अलग    जुबानी , बोले समयानुसार    कटु  मृदु  बानी। कटु  बानी  भी  मित्र[...]

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कलम का सिपाही- मुक्तक – राम किशोर पाठककलम का सिपाही- मुक्तक – राम किशोर पाठक

0 Comments 10:31 pm

कलम का सिपाही- मुक्तक कलम का कोई सिपाही है कहा। मुफलिसी आटा गिला करता रहा।। चाँद तारे रौशनी करते रहें।[...]

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Amarnath Trivedi

मित्रता जीवन की अनमोल निधि – अमरनाथ त्रिवेदीमित्रता जीवन की अनमोल निधि – अमरनाथ त्रिवेदी

0 Comments 8:27 am

मित्रता जीवन की अनमोल निधि मित्रता जीवन की अनमोल निधि है , यह एक दूसरे से जुड़ने की विधि है[...]

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जिसको मित्र बनाया है – लावणी छंद गीत – राम किशोर पाठकजिसको मित्र बनाया है – लावणी छंद गीत – राम किशोर पाठक

0 Comments 8:26 am

जिसको मित्र बनाया है – लावणी छंद गीत आँख खोलकर इस भूतल पर, ज्यों हमने मुस्काया है। रिश्ते नाते हमने[...]

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Devkant

दोहावली- देवकांत मिश्र ‘दिव्य’दोहावली- देवकांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 5:54 pm

दोहावली “””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””” बहें भावना में नहीं, कभी सहजता भाव। हीन कलुषता त्याग कर, बनें कर्म की नाव।।०१ भावों में भीगें[...]

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Amarnath Trivedi

सपने को साकार करें हम – अमरनाथ त्रिवेदीसपने को साकार करें हम – अमरनाथ त्रिवेदी

0 Comments 1:49 pm

सपने को साकार करें हम गलत बातों में कभी  नहीं पड़ेंगे, अपने  सपने को  साकार करेंगे । हर पल चिता[...]

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बचपन अपना – प्रहरणकलिका छंद – राम किशोर पाठकबचपन अपना – प्रहरणकलिका छंद – राम किशोर पाठक

0 Comments 1:48 pm

बचपन अपना – प्रहरणकलिका छंद हरपल सबसे मिलकर कहते। हम-सब अपने बनकर रहते।। बरबस कुछ भी कब हम करते। सुरभित[...]

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हमें तरु-मित्र बनना होगा- राम किशोर पाठकहमें तरु-मित्र बनना होगा- राम किशोर पाठक

0 Comments 7:43 am

हमें तरु-मित्र बनना होगा नया सोपान गढ़ना होगा। हमें तरु-मित्र बनना होगा।। दादा के रोपें पेड़ों से, हमने है कितने[...]

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Amarnath Trivedi

बिना विचारे नहीं करें – अमरनाथ त्रिवेदीबिना विचारे नहीं करें – अमरनाथ त्रिवेदी

0 Comments 10:52 am

बिना विचारे नहीं करें बिना   विचारे  नहीं  करें  जीवन  में कोई काम , ऐसा यदि नहीं  किया   तो  होगा  बुरा [...]

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