नीर भूगर्भ का जानिए- उज्ज्वला छंद बातें कुछ करने आइए। अपनी सोच तो बताइए।। मीठे जल को पी पाइए। खत्म[...]
Category: sandeshparak
Sandeshparak poems are poems that are used to convey a message with feelings. Through poems, statements related to the country, the world, and society are transmitted to the people. Teachers of Bihar give an important message through the Sandeshparak of Padyapankaj.
महासागर – बाल कविता – राम किशोर पाठकमहासागर – बाल कविता – राम किशोर पाठक
महासागर आओ बच्चों तुम्हें बताएँ। बात पुरानी याद दिलाएँ।। सात समंदर कहती नानी। दूर देश की कथा सुहानी।। आओ जाने[...]
मैं पथ का निर्भीक राही- कंचन प्रभामैं पथ का निर्भीक राही- कंचन प्रभा
मैं पथ का निर्भीक राही पथ के राही चले बेफिक्र मंजिलें दूर हो रास्ते कठिन हो पथरीली डगर हो काँटे[...]
नर-नारी दोनों का जग में – लावणी छंद गीत- राम किशोर पाठकनर-नारी दोनों का जग में – लावणी छंद गीत- राम किशोर पाठक
नर- नारी दोनों का जग में – लावणी छंद गीत प्रेम भाव जब रहता मन में, भरकर लगता गागर है।[...]
खाद्य सुरक्षा पर रखना ध्यान – मृत्युंजय कुमारखाद्य सुरक्षा पर रखना ध्यान – मृत्युंजय कुमार
खाद्य सुरक्षा पर रखना ध्यान सुरक्षित और स्वस्थ भोजन हो अपना। तभी स्वास्थ्य बेहतर रहेगा अपना।। मिलावटी खाद्य सामग्री पहचानें।[...]
स्वस्थ जीवन जीने की तैयारी – अमरनाथ त्रिवेदीस्वस्थ जीवन जीने की तैयारी – अमरनाथ त्रिवेदी
स्वस्थ जीवन जीने की तैयारी जब जगे तभी सवेरा , यही सोच सदा नित बनी रहे । अब तो स्वस्थ [...]
गंगा दशहरा – द्विगुणित सुंदरी छंद गीत – राम किशोर पाठकगंगा दशहरा – द्विगुणित सुंदरी छंद गीत – राम किशोर पाठक
गंगा दशहरा – द्विगुणित सुंदरी छंद गीत मास ज्येष्ठ दशमी को, गंगा भू पर आना। आज दशहरा गंगा, जन-जन में[...]
क्या मैं अबोध हूॅं – राम किशोर पाठकक्या मैं अबोध हूॅं – राम किशोर पाठक
क्या मैं अबोध हूॅं। माँ सुनो तो, एक बात जरा, क्या मैं अबोध हूॅं ? पाँच वर्ष की हो गयी,[...]
सीख- विजात छंद मुक्तक – राम किशोर पाठकसीख- विजात छंद मुक्तक – राम किशोर पाठक
सीख- विजात छंद मुक्तक सदा वाणी सहज बोलें। नहीं विद्वेष को घोलें।। अगर कोई सताए तो। नहीं चुपचाप से रो[...]
गरल सहज जो पी लेते हैं – स्नेहलता द्विवेदी ‘आर्या’गरल सहज जो पी लेते हैं – स्नेहलता द्विवेदी ‘आर्या’
गरल सहज जो पी लेते हैं मधुर सुधा रस पी लेते हैं, बोलो देखा है कल किसने, प्रतिपल जीवन जी[...]
