यही रात अंतिम, यही रात भारी विषय -पक्षियों की गोष्ठी। बकरी, मुर्गी,अंडा , मछली और कबूतर ये सभी हैं मीत,[...]
Category: sandeshparak
Sandeshparak poems are poems that are used to convey a message with feelings. Through poems, statements related to the country, the world, and society are transmitted to the people. Teachers of Bihar give an important message through the Sandeshparak of Padyapankaj.
कीमत चुकानी होगी – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’कीमत चुकानी होगी – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
कीमत चुकानी होगी मनहरण घनाक्षरी छंद में बिजली के कटने से, बढ़ जाती परेशानी, ए सी में जो रहने की,[...]
बाल सपने – सार्द्ध मनोरम छंद- राम किशोर पाठकबाल सपने – सार्द्ध मनोरम छंद- राम किशोर पाठक
बाल सपने – सार्द्ध मनोरम छंद पाँव में पाजेब मनहर बाँध अपने। नाचते हैं श्याम बनकर बाल सपने।। देखकर नंगे[...]
कर्म – गिरींद्र मोहन झाकर्म – गिरींद्र मोहन झा
कर्म जो किया जाता है, वही होता है ‘कर्म’, जो करने योग्य हो, वही है कर्त्तव्य-कर्म, कहते हैं, कर्म के[...]
जीवनदान- विजय शंकर ठाकुरजीवनदान- विजय शंकर ठाकुर
// जीवनदान // पेड़ खड़े थे, पत्ते हरे थे, फल लगे थे, झूले डले थे, बाहर धूप थी, वहां छाया[...]
एक पेड़ मांँ के नाम – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’एक पेड़ मांँ के नाम – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
एक पेड़ मांँ के नाम मनहरण घनाक्षरी छंद में बहुत खुशी की बात, आ गई है बरसात, पेड़-पौधे लगाकर, धरा[...]
यह धरती है प्रभु की प्यारी – अमरनाथ त्रिवेदीयह धरती है प्रभु की प्यारी – अमरनाथ त्रिवेदी
यह धरती है प्रभु की प्यारी हम बच्चे अपने धुन में गाएँ, प्रभु चरणों में शीश नवाएँ । जिनका है[...]
कल का सपना – राम किशोर पाठककल का सपना – राम किशोर पाठक
कल का सपना सपनों और अपनों के बीच, जीवन जीते हम-सब रहते। साँसों की डोरी को अपने, पल-पल सदा सँजोते[...]
वर्षा और सावन- अमरनाथ त्रिवेदीवर्षा और सावन- अमरनाथ त्रिवेदी
वर्षा और सावन सावन आया बड़ा सुहावन , लगता है इसमें मनभावन । इस माह होते कई पावन , ये[...]
अकेलापन- गिरींद्र मोहन झाअकेलापन- गिरींद्र मोहन झा
अकेलापन जीवन की रणभूमि में हम सब अकेले हैं, सुख-दुख बांटने हेतु ही इस जग के मेले हैं, जब पड़[...]
