सपने को साकार करें हम गलत बातों में कभी नहीं पड़ेंगे, अपने सपने को साकार करेंगे । हर पल चिता[...]
Category: sandeshparak
Sandeshparak poems are poems that are used to convey a message with feelings. Through poems, statements related to the country, the world, and society are transmitted to the people. Teachers of Bihar give an important message through the Sandeshparak of Padyapankaj.
बचपन अपना – प्रहरणकलिका छंद – राम किशोर पाठकबचपन अपना – प्रहरणकलिका छंद – राम किशोर पाठक
बचपन अपना – प्रहरणकलिका छंद हरपल सबसे मिलकर कहते। हम-सब अपने बनकर रहते।। बरबस कुछ भी कब हम करते। सुरभित[...]
हमें तरु-मित्र बनना होगा- राम किशोर पाठकहमें तरु-मित्र बनना होगा- राम किशोर पाठक
हमें तरु-मित्र बनना होगा नया सोपान गढ़ना होगा। हमें तरु-मित्र बनना होगा।। दादा के रोपें पेड़ों से, हमने है कितने[...]
बिना विचारे नहीं करें – अमरनाथ त्रिवेदीबिना विचारे नहीं करें – अमरनाथ त्रिवेदी
बिना विचारे नहीं करें बिना विचारे नहीं करें जीवन में कोई काम , ऐसा यदि नहीं किया तो होगा बुरा [...]
स्वास्थ्य और भौतिक संसाधन – अमरनाथ त्रिवेदीस्वास्थ्य और भौतिक संसाधन – अमरनाथ त्रिवेदी
स्वास्थ्य और भौतिक संसाधन संसाधनों के अंबार लगे हैं , दुनिया के कोने कोने में । फिर भी न कोई[...]
सुविधा और स्वास्थ्य- कुण्डल छंद- राम किशोर पाठकसुविधा और स्वास्थ्य- कुण्डल छंद- राम किशोर पाठक
सुविधा और स्वास्थ्य- कुण्डल छंद सुविधाएंँ सभी आज, सबको हैं प्यारे। मशीन बन गए लोग, एहसास मारे।। करते सभी आराम,[...]
भौतिक सुविधा और स्वास्थ्य- अमरनाथ त्रिवेदीभौतिक सुविधा और स्वास्थ्य- अमरनाथ त्रिवेदी
भौतिक सुविधा और स्वास्थ्य आज होड़ लगी है भौतिक सुख सुविधा की , स्वास्थ्य के लिए कुछ दोस्त बने कुछ[...]
सुख सुविधाओं के चक्कर में- सरसी छंद गीत- राम किशोर पाठकसुख सुविधाओं के चक्कर में- सरसी छंद गीत- राम किशोर पाठक
सुख सुविधाओं के चक्कर में- सरसी छंद गीत अपने हाथों से जीवन में, घोल रहा विष जान। सुख सुविधाओं के[...]
गुरुवर वाले प्रेम से – अवतार छंद गीतिका- राम किशोर पाठकगुरुवर वाले प्रेम से – अवतार छंद गीतिका- राम किशोर पाठक
गुरुवर वाले प्रेम से – अवतार छंद गीतिका झूम रहे सब संग में, कुछ आज कीजिए। गुरुवर वाले प्रेम से,[...]
घट-घट वासी शिव संन्यासी – सरसी छंद गीत – राम किशोर पाठकघट-घट वासी शिव संन्यासी – सरसी छंद गीत – राम किशोर पाठक
घट-घट वासी शिव संन्यासी – सरसी छंद गीत बैठे हैं भस्म लगा कैलाशी, करते बेड़ा पार। घट-घट वासी शिव संन्यासी,[...]
