हिंदी माथे की बिंदी- जैनेन्द्र प्रसाद रवि

मनहरण घनाक्षरी छंद भाग-१सुगम हमारी हिन्दी,देश के माथे की बिंदी,हिंदी से ही भारत की, होती पहचान है। संस्कृत की बेटी यह-कहलाती मातृभाषा,हिंदी में तो पढ़ना व, लिखना आसान है। करोड़ों…

गरिमा की भाषा हिंदी

गरिमा की भाषा यह हिंदी  मानव जीवन का आधार है ,जीवन की गतिविधि चलती इससे यह संस्कृति का आगार है ।माध्यम शिक्षा का सर्वोच्च  इससे जुड़ता संसार है ,यह संबंधों का…

इंस्पायर्ड अवॉर्ड पैगाम-विवेक कुमार

सुनो सुनो सुनो…………..    लाया हूं एक सुंदर-सा पैगाम,नवाचार में जिला ने किया नाम,देश में पाया पहला मुकाम,मुकाम पा लहराया परचम,बढ़ाया देश में जिले का मान,छात्रों का बढ़ाया अभिमान,पायी उपलब्धि आसान…

बच्चे रोज आते स्कूल- नीतू रानी

बच्चे रोज आते स्कूल,पेंसिल लाना जाते भूल। बच्चे को है खेल पसंद,पढ़ने में नहीं आता आनंद। मोबाईल चलाने में नंबर वन,टीवी देखने में लगता है मन। बिना मोबाईल चलाएँ खाना…

हिंदी: सुर वाणी की जाया- राम किशोर पाठक

हिंदी, सुर वाणी की जाया- किशोर छंद सुर वाणी की जाया कहिए, हिंदी को। भूल रहे सब क्यों है गहिए, हिंदी को।। हृदय भाव में फिर से भरिए, हिंदी को।…

चलो नेह का दीप जलाएँ- किशोर छंद – राम किशोर पाठक

चलो नेह का दीप जलाएँ- किशोर छंद चलो नेह का दीप जलाएँ, कैसे भी। सबसे मिलकर स्नेह बढ़ाएँ, कैसे भी। क्षमा भाव को मन में लाएँ, कैसे भी। सबको अपना…

शिक्षक – रत्ना प्रिया

शिक्षक अशिक्षित को जो शिक्षित कर दे,ज्ञान से तम को हर ले,दृढ़ आशा की किरण देकर,सुपथ पर ले जाते हैं ।वह शिक्षक कहलाते हैं । शिक्षक दिनकर-सा उजियारा,प्रकाशित तम हो…