Category: Shaikshnik

Amarnath Trivedi

वर्षा और जन-जीवन – अमरनाथ त्रिवेदीवर्षा और जन-जीवन – अमरनाथ त्रिवेदी

0 Comments 5:40 pm

वर्षा और जनजीवन वर्षा ही देती हम सबकी पहचान । इसके बगैर  निकल रही सबकी जान ।। बिन वर्षा के[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

वर्षा और जीवन – अंजनेय छंद – राम किशोर पाठकवर्षा और जीवन – अंजनेय छंद – राम किशोर पाठक

0 Comments 5:38 pm

वर्षा और जीवन – अंजनेय छंद धूम मचाकर बरसा आती। नभ में अपनी नाच दिखाती।। भिन्न-भिन्न वह वेश बनाती। अवनी[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Amarnath Trivedi

वर्षा और जीवन- अमरनाथ त्रिवेदीवर्षा और जीवन- अमरनाथ त्रिवेदी

0 Comments 5:31 pm

वर्षा और जीवन  वर्षा  पर  ही  जीवन की , गतिविधि  सारी चलती है । इसके  बिना  धरती    भी , तवा [...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

जल बूँदों के संग में – मुक्तामणि छंद गीत- राम किशोर पाठकजल बूँदों के संग में – मुक्तामणि छंद गीत- राम किशोर पाठक

0 Comments 5:30 pm

जल बूँदों के संग में – मुक्तामणि छंद गीत वर्षा आती देखकर, झूम उठे हैं सारे। जल बूँदों के संग[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

चिकित्सक का कार्य – गीतिका – राम किशोर पाठकचिकित्सक का कार्य – गीतिका – राम किशोर पाठक

0 Comments 5:15 pm

चिकित्सक का कार्य – गीतिका वैद्य, चिकित्सक, हकीम सारे। सबका जीवन सदा सँवारे।। रक्त, लहू, शोणित, लोहित जो। रुधिर, खून[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

प्रकाश संश्लेषण – विधा दोहें – राम किशोर पाठकप्रकाश संश्लेषण – विधा दोहें – राम किशोर पाठक

0 Comments 10:31 pm

प्रकाश संश्लेषण – दोहें जिज्ञासा बच्चे लिए, गुरुवर करें निदान। कैसे भोजन पेड़ में, बनता है श्रीमान।।०१।। कैसे पोषण पा[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

जगन्नाथपुरी रथयात्रा – राम किशोर पाठकजगन्नाथपुरी रथयात्रा – राम किशोर पाठक

0 Comments 9:42 pm

जगन्नाथपुरी रथ-यात्रा- दोहें उत्कल प्रदेश में चलें, जहाँ ईश का धाम। शंख- क्षेत्र, श्रीक्षेत्र है, उसी पुरी का नाम।।०१।। युगल[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

विद्यालय और सामाजिक बदलाव – राम किशोर पाठकविद्यालय और सामाजिक बदलाव – राम किशोर पाठक

0 Comments 9:47 pm

विद्यालय और सामाजिक बदलाव शिक्षा समाज का किस्सा है। विद्यालय इसका हिस्सा है।। विविध रूप जो बोल रहे हैं। स्व[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

विद्यालय संजोती, दिव्य ज्ञान सरिता- हरिप्रिया छंद – राम किशोर पाठकविद्यालय संजोती, दिव्य ज्ञान सरिता- हरिप्रिया छंद – राम किशोर पाठक

0 Comments 9:58 pm

विद्यालय संजोती, दिव्य ज्ञान सरिता- हरिप्रिया छंद आओ समझें ऐसे, गढ़ें संबंध जैसे, बनता समाज वैसे, प्रकट करे ललिता। सीख[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें