आओ कर लें योग – सरसी छंद गीत जीवन है अनमोल मनुज का, मिले विविध संयोग। रहना है नीरोग हमें तो, आओ कर लें योग ।। गीता में श्रीकृष्ण कहें…
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शब्द भेद की सार्थकता – अमरनाथ त्रिवेदी
शब्द भेद की सार्थकता शब्द में कितनी शक्ति छिपी है , हम इस बात को जरा जानें । एक समय बच्चा को कहें बउआ , उसी बच्चे को फिर …
शब्द भेद को जानें – राम किशोर पाठक
शब्द-भेद को जानें देववाणी सुता है हिंदी। भारत माता की है बिंदी।। आओ इसका रूप निहारे। बहती जिसमें भाव हमारे।। कुछ के सीधे अर्थ समझते। कुछ अटपट सा समझ न…
शब्द भेद की व्यापकता – अमरनाथ त्रिवेदी
शब्द भेद की व्यापकता अक्षर- अक्षर से बनते शब्द , मैं उस शब्द के भेद बताने आया हूँ । उस भेद में रहते कैसे शब्द , जरा मै उसे …
शब्दों के हैं रूप निराले – चौपाई छंद – राम किशोर पाठक
शब्दों के हैं रूप निराले – चौपाई छंद यूँ जो ध्वनियाँ बोली जाती। भावों को अपने बतलाती।। वर्णों से जो निर्मित होती। है शब्द वही तो कहलाती।। शब्दों के है…
मौसम गर्मी वाला आया-चौपाई छंद – राम किशोर पाठक
मौसम गर्मी वाला आया- चौपाई छंद – बाल कविता बिटिया रानी सुनो कहानी। दुनिया करती है नादानी।। कभी न करना तुम मनमानी। जिससे बढ़े कुछ परेशानी।। मौसम गर्मी वाला आया।…
गौ माता को हम-सब जानें – राम किशोर पाठक
गौ माता को हम-सब जानें – बाल कविता दुग्ध, क्षीर, पय, गोरस लाना। स्तन्य, पीयूष, दोहज जाना।। सुधा, सोम हीं सुर को भाए। देवाहार यही कहलाए।। जीवनोदक, अमृत भी कहते।…
पड़ती गर्मी प्रचंड है – लावणी छंद गीत – राम किशोर पाठक
पड़ती गर्मी प्रचंड है – लावणी छंद गीत ताल, तलैया, सरवर सूखा, भू दिखता खंड-खंड है। प्यासा पंछी खोज रहा जल, गर्मी बड़ा प्रचंड है।। झुलस गया है बाग, बगीचा,…
भूजल का दोहन करें नहीं- लावणी छंद गीत – राम किशोर पाठक
भूजल का दोहन करें नहीं- लावणी छंद गीत भूजल का दोहन करें नहीं, संग्रह बहुत जरूरी है। बसा भूगर्भ में मधुरिम यह, बनी आज मजबूरी है।। मान लिया सच भूमंडल…
भूगर्भ जल – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान ‘
भूगर्भ जल- उज्जवला छंद ज्ञान बहुत तेरे पास है। मुझसे फिर रखते आस है।। तो आओ मेरे साथ में। हाथों को डालो हाथ में।।। गहराई को जो नापते। सागर के…