मैं हूं शिक्षक मैं इस धरा के ज्ञान धर्म का वाहक हूँ, जननी के स्वाभिमान मर्म का नायक हूँ। मैं शिक्षक संस्कार, सत्य तप का राही, वसुधा से अज्ञान मिटाने…
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डालती रंग है रामकिशोर पाठक
डालती रंग हैं- अरुण छंद होली गीत पीसकर, सिल सदा, शिव पिए भंग हैं। पार्वती, रूद्र को, डालती रंग हैं।। नेत्र हैं, शिव किए, लाल पीला जहाँ। रंग नव, भर…
छुट्टियों की खुशियां मृत्युंजय कुमार
छुट्टियों की खुशियाँ… छुट्टियों के दिन आए हैं, बच्चों में खुशियाँ छाई हैं। मौज-मस्ती खूब करेंगे, नहीं किसी से तनिक डरेंगे। रोज़-रोज़ जाते हैं स्कूल, स्कूल को कह सकते हैं…
संकल्प- मनु कुमारी
संकल्प (कविता) संकल्प जगे जब अंतर में, तो पथ स्वयं बन जाता है। साहस के चरण जहाँ पड़ें, भय वहीं मिट जाता है।। साक्षी है यह इतिहास स्वयं, हर युग,…
धैर्य रामकिशोर पाठक
धैर्य – शक्ति छंद मात्रिक गीत हमें आप इतना बता दीजिए। कहाँ धैर्य खोया पता कीजिए।। हमें भी जरा सा पता तो चले। किया क्या खता मैं हुआ क्यों गिले।।…
मेरी गुड़िया नीतू रानी
विषय -बाल कविता। शीर्षक -मेरी गुड़िया फल, सब्जी से बनी है। मेरी गुड़िया फल, सब्जी से बनी है, दिखने क्या अद्भुत लग रही है। बाल मेरी गुड़िया का हरी मिर्ची…
मुट्ठी में रेत… मनु कुमारी
मुट्ठी में रेत-सी है यह जीवन की कहानी,कब फिसल जाए उँगलियों से, किसे है यह निशानी।काग़ज़-सा भीग जाए, जल में घुल जाए पल में,बूँदों का बुलबुला-सा, टूटे क्षण भर के…
होली गाए रे- रामकिशोर पाठक
होली गाए रे मचल-मचल के भ्रमर कुमुदिनी में छुप जाए रे। आज पपीहा कूक मधुर सी होली गाए रे।। कलियाँ हंँसकर इठलाई खोल पंखुरियाँ रे। लगी तितलियाँ मँडराने गलियाँ-गलियाँ रे।।…
ग़जल-रामपाल प्रसाद
ग़ज़ल दूर कितना मगर चलेंगे हम। दिख रहा है शहर चलेंगे हम।। शीत अब छोड़ है गया मग को। दिख रही है डगर चलेंगे हम।। मान्यताऍं नहीं सरल फिर भी।…
प्रेम- रामकिशोर पाठक
प्रेम – सरसी छंद गीत प्रेमिल रहना चाहत सबकी, उलझन में संसार। करते सब हैं प्रेम जगत में, सबके अलग प्रकार।। कोई धन से नाता जोड़े, देता है जी जान।…