हरि गीतिका छंद बागेश्वरी माॅं श्वेतपद्ममा,ज्ञानदा या भारती। आकार सबके एक जिनकी,हम उतारे आरती।। शुभ भोर सुंदर पूर्व से ही,देव जागे हैं यहाॅं। दिनकर सजाकर रश्मियाॅं पर,संग भागे हैं यहाॅं।।…
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वंदनवार सजे शारदा -रामपाल प्रसाद सिंह
वंदनवार सजे शारदा ऐसा अद्भुत भोर। क्षितिज चतुर्दिक दे रहा,ऑंधी जैसा शोर। प्रात:काली भूल कर, पूर्वज ढाड़े लोर।। कहीं भजन कीर्तन ठने,कहीं राम का बोल। कहीं शारदा सादगी,सह भोजपुरी झोल।।…
जय मां शारदे माँ तू अपने शरण में रखो अब सदा, है नमन कोटि रखना चरण मे सदा. तू दे दे हमें माँ ये आशीष कदा, ज्ञान जीवन में सुरभित…
आया बसंत आशीष अम्बर
कविता :- आया बसंत दिन को सूरज लगा चमकने, हवा लगी अब सरसर बहने । पत्ते पीले पड़े पेड़ के, झड़ते हवा संग हैं उड़ते । ऋतु बसंत का स्वागत…
मान मिल जाए -रामकिशोर पाठक
मान मिल जाए- गजल १२२२-१२२२, १२२२-१२२२ दबे कुचले यहाँ जो भी, उन्हें सम्मान मिल जाए। रहे कानून में समता, सही पहचान मिल जाए।। हमें रखना सदा होगा, यहाँ पर ध्यान…
मैं टीचर ऑफ बिहार हूं -रामकिशोर पाठक
मैं टीचर्स ऑफ बिहार हूँ – गीत शिक्षा का अटल आधार हूँ। मैं टीचर्स ऑफ बिहार हूँ।। बच्चों के कोमल भावों को। अपनाकर सभी सुझावों को।। शिक्षण का बना व्यवहार…
सरस्वती प्रार्थना -रामकिशोर पाठक
सरस्वती प्रार्थना- द्विगुणित सुंदरी छंद गीत फँसे मँझधार में हैं, दे दो किनार मैया। कोई मिला न जग में, सुन लो पुकार मैया।। कुछ भी समझ न आए, वक्त निकलता…
बसंत पंचमी
धनाक्षरी छंद में बसंत पंचमी पर्व,खुशी-खुशी मनाते हैं,सभी भक्त माॅं शारदे का आशीष पाते हैं। हर वर्ष यह पर्व,माघ पंचमी को आता,हम सभी पूरी निष्ठा, श्रद्धा से मनाते हैं। हॅंस…
माता वाणी से विनय- रामकिशोर पाठक
माता वाणी से विनय- विधाता छंद गीत पुकारूँ मैं तुम्हें माता, जरा मुझपर तरस खाओ। हरो अज्ञानता मेरी, सहज कुछ ज्ञान दे जाओ।। जरा वीणा बजा दो माँ, सभी सुर…
प्रकट हो माता भवानी रामपाल प्रसाद सिंह
कुंडलिया प्रकट हो मात भवानी। (दुर्गा/पार्वती) मात भवानी प्रेरणा,शक्ति पुंज आधार। धरा अकारण मानती,तेरा ही उपकार।। तेरा ही उपकार,सघन हरियाली छाई। संकट में संसार,आप ही सम्मुख आई।। कहते हैं”अनजान”,अमिट है…