दिखा जो मीत चुन लेती-एस.के.पूनम

S K punam

घनी-सी है चिकुर काली,

न भीगे हैं पलक तेरी।

गुलाबी रंग गालों का,

अधर पर है हँसी मेरी।

छिपाई जो दिखा दे तुम,

कहा प्रिय को इशारे में।

अपरिचित राह पर चल कर,

तुझे खोजा सितारों में।

(2)

लगाया नेह तुम से ही,

तुम्हारा ये दिवाना है।

निहारा है झरोखों से,

मिलन का पल सुहाना है।

गहन है प्रीत तुमसे ही,

जमाने से सदा कहता।

तुम्हारी हर खुशी से खुश,

तुम्हारी वेदना हरता।

(3)

न भटका था कभी मन से,

रहा हूँ मैं सदाचारी।

उकेरा रूप की छाया,

यही मेरी अदाकारी।

हुआ गदगद तुम्हें पाकर,

हृदय के द्वार को खोला।

दिखा जो मीत चुन लेती,

झुकाता शीश मैं भोला।

एस.के.पूनम

सेवानिवृत्त शिक्षक,फुलवारी शरीफ, पटना।

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